International News: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी हिंसक संघर्ष को रोकने के लिए 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है। इस महासमझौते को लेकर पिछले कई दिनों से जारी भारी गोपनीयता पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है। अमेरिका ने ईरान के साथ होने वाले 14 सूत्रीय समझौते का पूरा ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है।
‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ नाम से होगी डील
इस बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज़ का आधिकारिक नाम ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बिटवीन द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका एंड द इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ रखा गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार तड़के समाचार एजेंसी एएफपी को कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए इस पूरे सीक्रेट ड्राफ्ट का ब्योरा पढ़कर सुनाया है।
यह दस्तावेज़ कोई पूर्ण और अंतिम समझौता नहीं बल्कि एक शुरुआती एमओयू (MoU) होगा। इस पर 19 जून को दोनों देशों के प्रतिनिधि हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद दोनों ही पक्षों को एक फाइनल और व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए अधिकतम 60 दिनों का समय मिलेगा। आपसी सहमति बनने पर इस समय सीमा को और आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई और नौसैनिक नाकाबंदी होगी खत्म
लीक हुए एमओयू के ड्राफ्ट के अनुसार, दोनों देश लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी अपने सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त कर देंगे। अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ लगाई गई अपनी सख्त नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह खत्म कर देगा, जिससे जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट सके।
फाइनल समझौता होने के 30 दिनों के अंदर अमेरिकी सेना अपने सभी सुरक्षा बलों को ईरान के आसपास के समुद्री और जमीनी क्षेत्रों से वापस बुला लेगी। इसके बदले में ईरान ने भी वादा किया है कि वह अगले 60 दिनों तक सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध कराएगा।
ईरान नहीं बनाएगा परमाणु हथियार, बदले में मिलेगा 300 अरब डॉलर का फंड
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जारी इस मसौदे में दावा किया गया है कि ईरान ने भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर अपनी सहमति दे दी है। दोनों देश ईरान के संवर्धित यूरेनियम को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की सख्त निगरानी में ब्लेंडिंग प्रक्रिया के जरिए नष्ट करने में पूरा सहयोग करेंगे।
परमाणु कार्यक्रम बंद करने के बदले में अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालने और उसके पुनर्निर्माण में बड़ी मदद करेगा। इसके लिए अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ मिलकर 300 अरब डॉलर के एक स्पेशल फंड की स्थापना करेगा। इसके साथ ही ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध भी पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे।
Author: Pallavi Sharma


