उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट: नवंबर-दिसंबर में हो सकते हैं मतदान, जानें सियासी समीकरण

Dehradun News: उत्तराखंड के सियासी गलियारों में इन दिनों विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने की सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि राज्य में इसी साल नवंबर या दिसंबर में ही मतदान कराए जा सकते हैं। इस संभावित बदलाव ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

हालांकि, इस विषय पर अभी तक कोई भी अधिकारी या बड़ा नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 23 मार्च को समाप्त होने जा रहा है। आमतौर पर राज्य में चुनाव फरवरी या मार्च के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाते रहे हैं।

इस बार भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के लगातार दौरों से इन अटकलों को और बल मिल रहा है। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया भी बेहद तेजी से चल रही है। इन तमाम परिस्थितियों को समय से पहले होने वाले चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रशासनिक अमले के सामने अर्द्धकुंभ, जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं का त्रिकोणीय पेच

समय से पहले चुनाव कराने के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं हैं, बल्कि तीन बड़े व्यावहारिक कारण भी सामने आ रहे हैं। अगले साल 14 जनवरी से हरिद्वार में भव्य अर्द्धकुंभ का आयोजन होना है। इसके तुरंत बाद फरवरी महीने से देश भर में राष्ट्रीय जनगणना का काम शुरू हो जाएगा।

इसके साथ ही मार्च महीने में बोर्ड परीक्षाएं भी आयोजित होनी हैं। परीक्षाओं के कारण ज्यादातर शिक्षक व्यस्त रहेंगे, जिससे पोलिंग बूथों के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में भारी दिक्कत आ सकती है। इन बड़े आयोजनों के चलते पूरा सरकारी और पुलिस प्रशासनिक अमला पूरी तरह व्यस्त रहेगा।

अगर चुनाव अपने तय समय यानी मार्च में होते हैं, तो चुनाव आयोग और सरकारी मशीनरी के सामने एक साथ इतने बड़े आयोजन संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। यही सबसे बड़ी वजह है कि सरकार और चुनाव आयोग इस बार साल के अंत में ही मतदान कराने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

शीर्ष नेताओं के दौरों से गरमाया देवभूमि का सियासी पारा

भले ही चुनावों की तारीखों का आधिकारिक एलान नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल अभी से पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लगातार उत्तराखंड के दौरे कर रहे हैं।

भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन भी राज्य में लगातार संगठनात्मक बैठकें लेकर चुनावी शंखनाद कर चुके हैं। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हाल ही में उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं, हालांकि खराब मौसम के कारण उनकी कुछ जनसभाएं प्रभावित हुई थीं।

कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी सैलजा भी लगातार राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में जुटी हैं। दोनों ही दलों के आला नेताओं की इस भारी सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में चुनावी बिगुल किसी भी वक्त बज सकता है और सभी दल इसके लिए तैयार हैं।

Author: Harish Rawat

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