Business News: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जून की पॉलिसी बैठक में बड़ा फैसला लिया है। लगातार चौथी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दरें 3.50 से 3.75 फीसदी पर बरकरार हैं। केविन वॉर्श की अध्यक्षता में यह पहली बैठक थी। इससे शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है।
फेडरल रिजर्व ने क्यों नहीं घटाई ब्याज दरें?
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला सर्वसम्मति से लिया है। साल 2026 की शुरुआत से दरें इसी स्तर पर बनी हुई हैं। अधिकारी पॉलिसी में किसी भी बदलाव से पहले महंगाई और आर्थिक विकास के ठोस आंकड़े चाहते हैं। ग्लोबल इकॉनमी में अनिश्चितता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भी प्रमुख कारण हैं।
फेड के अनुसार अमेरिका की आर्थिक गतिविधियां और लेबर मार्केट मजबूत स्थिति में हैं। इसके बावजूद महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर चल रही है। अधिकारियों ने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है। अब कोर महंगाई दर 3.3 फीसदी और सामान्य महंगाई 3.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह निवेशकों के लिए चिंताजनक है।
भविष्य में दरें बढ़ने की आशंका से डरा बाजार
फेडरल रिजर्व के नए अनुमान बताते हैं कि साल के अंत तक ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। नौ अधिकारियों का मानना है कि 2026 में दरों में बढ़ोतरी जरूरी है। केवल एक अधिकारी ने दरें घटाने का समर्थन किया। महंगाई को काबू में करने के इस सख्त रवैये ने शेयर बाजार का मूड पूरी तरह से खराब कर दिया है।
फेड के इस सतर्क रुख का अमेरिकी शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर पड़ा है। नैस्डैक इंडेक्स में करीब डेढ़ फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, डाव जोंस एक फीसदी और एसएंडपी 500 लगभग 1.50 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से निवेशकों ने जमकर बिकवाली शुरू कर दी है।
सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चमक भी फीकी पड़ गई है। सोने की कीमतों में करीब दो फीसदी की भारी गिरावट आई है। कॉमेक्स पर सोना 87 डॉलर टूटकर 4,267.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी भी साढ़े तीन फीसदी लुढ़ककर 68.10 डॉलर प्रति औंस पर है। इससे कमोडिटी बाजार में बड़ी हलचल मच गई है।
Author: Rajesh Kumar


