नेतन्याहू पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, कहा- ‘फैसले लेने की समझ नहीं, इजरायल ने कराई शांति समझौते में देरी’

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू में सही समय पर फैसले लेने की समझ बिल्कुल नहीं है। अगर इजरायल ने लेबनान पर हमला नहीं किया होता, तो अब तक ऐतिहासिक शांति समझौता हो जाता।

प्रसिद्ध न्यूज आउटलेट ‘एक्सिओस’ से खास बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अभी भी पटरी पर है। इस समझौते से क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य का व्यापारिक मार्ग भी पूरी तरह खुल सकता है।

हस्ताक्षर से ठीक एक घंटे पहले हुआ हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति इस संभावित समझौते को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह डील इजरायल द्वारा दक्षिणी बेरूत में किए गए हमले के बाद टूटने की कगार पर पहुंच गई थी। इस हवाई हमले में तीन बेकसूर लोगों की मौत हो गई और छह अन्य नागरिक घायल हुए हैं।

ट्रंप ने बताया कि इस अप्रत्याशित हमले ने बनी-बनाई चीजों को पूरी तरह हिला कर रख दिया। इसके कारण समझौते पर हस्ताक्षर होने में कुछ घंटों की देरी हो गई है। जब उनके सलाहकारों ने उन्हें इस हमले की सूचना दी, तो वे पूरी तरह हैरान रह गए थे।

नेतन्याहू की हरकत से बेहद गुस्से में हैं ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह नेतन्याहू की इस हरकत से बहुत ज्यादा गुस्से में हैं। उन्होंने नेतन्याहू को फोन पर यह बात स्पष्ट कह दी है। ट्रंप के मुताबिक, समझौते से ठीक एक घंटे पहले इस हमले की कोई जरूरत नहीं थी।

इससे पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने सभी पक्षों से पीछे हटने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि इजरायल को लेबनान पर अब और हमले नहीं करने चाहिए। साथ ही हिजबुल्लाह को भी इजरायल पर रॉकेट दागना तुरंत बंद करना होगा।

ईरान ने दी इजरायल को गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी

ट्रंप का यह बड़ा बयान ईरान की उस कड़ी चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उसने लेबनान का समर्थन किया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह इजरायल के इन हवाई हमलों का बहुत कड़ा जवाब देगा। उनके इस रुख से क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

ईरान के कमांडर जनरल मोहम्मद जाफ़र असदी ने कहा कि इजरायल के इन अपराधों का जवाब जरूर दिया जाएगा। वहीं ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने भी वाशिंगटन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं कर सकता, तो बातचीत का कोई मतलब नहीं है।

Author: Pallavi Sharma

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