अमेरिका से निर्वासित यूक्रेनी युवकों को सीमा पर ही सेना में भेजा गया, ड्रोन ऑपरेटर बन मोर्चे पर लड़ रहे

World News: अमेरिका से निकाले जाने के बाद यूक्रेन लौटते ही कई सैन्य उम्र के युवाओं को सीधे सैन्य भर्ती केंद्र भेज दिया जा रहा है। हाल ही में एक उड़ान में 45 यूक्रेनी पुरुषों को निर्वासित किया गया। सीमा पार करते ही ड्रॉफ्ट अधिकारियों ने उनमें से कई को पकड़ लिया और ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। यह मामला ट्रंप प्रशासन की सख्त प्रवासन नीति और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच सैनिकों की कमी को उजागर कर रहा है।

45 यूक्रेनी पुरुषों को किया गया निर्वासित

17 नवंबर 2025 कोअमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने 45 यूक्रेनी पुरुषों और 5 महिलाओं को निर्वासित किया। उन्हें पोलैंड ले जाया गया और फिर यूक्रेनी सीमा पर सौंप दिया गया। यूक्रेन की स्टेट बॉर्डर सर्विस के अनुसार, इन 45 पुरुषों में से 24 वांटेड थे, यानी वे ड्राफ्ट नियमों का उल्लंघन कर चुके थे या अपना डेटा अपडेट नहीं कराए थे। इन्हें सीधे पुलिस को सौंप दिया गया और फिर सैन्य भर्ती कार्यालय भेजा गया।

ट्रंप की सख्त प्रवासन नीति का असर

ट्रंप केदूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने अवैध और कुछ वैध प्रवासियों पर सख्त कार्रवाई शुरू की। ‘यूक्रेन के लिए एकजुट’ (U4U) प्रोग्राम के तहत करीब 2.8 लाख यूक्रेनियनों को युद्ध से बचने के लिए अमेरिका आने की अनुमति मिली थी। अब कई मामलों में पैरोल रद्द किए जा रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) का कहना है कि वे अपराधी अवैध प्रवासियों पर फोकस कर रहे हैं, लेकिन कई निर्वासित केवल छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों या लंबित शरण के आधार पर थे।

यूक्रेन में सैनिकों की भारी कमी

चार साल सेअधिक चले युद्ध ने यूक्रेन की सेना में भारी जन-बल की कमी पैदा कर दी है। 25 से 60 वर्ष तक के सभी पुरुषों पर भरती लागू है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लगभग 20 लाख लोग ड्राफ्ट से बचने के लिए वांटेड हैं। निर्वासित पुरुषों की वापसी यूक्रेन के लिए लाभकारी साबित हो रही है। कई युवा ड्राफ्ट से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ने मोर्चे पर लड़ने का फैसला किया है।

डुडनिक की कहानी: ‘अमेरिका’ कॉलसाइन से लड़ रहे मोर्चे पर

28 वर्षीय टैटूआर्टिस्ट वोलोदिमीर डुडनिक नवंबर 2025 में निर्वासित 45 पुरुषों में शामिल थे। उन्होंने बताया कि सीमा पार करते ही उन्हें ट्रेनिंग सेंटर भेज दिया गया। 51 दिन बूट कैंप में बिताने के बाद उन्होंने ड्रोन ऑपरेटर की ट्रेनिंग ली। अब वे पूर्वी यूक्रेन के मोर्चे पर लड़ रहे हैं, जहां साथी सैनिकों ने उन्हें नया कॉलसाइन ‘अमेरिका’ दे दिया है। कई निर्वासितों ने बताया कि एक व्यक्ति के दो-तीन बच्चे थे, फिर भी उसे भेज दिया गया। एक 36 वर्षीय व्यक्ति, जो बचपन से अमेरिका में रह रहा था और यूक्रेनी भाषा भी ठीक से नहीं बोलता, उसे भी निर्वासित कर दिया गया।

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