International News: भारत और इंडोनेशिया के बीच होने वाली ऐतिहासिक ब्रह्मोस मिसाइल डील अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई के दूसरे हफ्ते में जकार्ता की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं। उनकी इस बेहद खास यात्रा के दौरान ही इस मेगा डिफेंस डील पर अंतिम मुहर लगेगी।
प्रधानमंत्री मोदी के इस रणनीतिक विदेश दौरे का सबसे बड़ा और शीर्ष एजेंडा रक्षा क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को अंतिम रूप देना है। दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश इंडोनेशिया अब फिलीपींस और वियतनाम के बाद भारत की इस खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल को खरीदने वाला तीसरा बड़ा ग्लोबल क्लाइंट बनने जा रहा है।
इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। यहां लगभग 24 करोड़ मुसलमान रहते हैं, जो कुल जनसंख्या का 87 फीसदी हैं। ऐसे में इंडोनेशिया का पश्चिमी देशों को छोड़कर भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदना पड़ोसी देश पाकिस्तान को भीतर ही भीतर काफी ज्यादा कुढ़ा सकता है।
पीएम मोदी की तीसरी जकार्ता यात्रा के बड़े मायने
प्रधानमंत्री मोदी जुलाई में तीसरी बार इंडोनेशिया के दौरे पर जा रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल यात्रा का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाना है। इस बार दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और मजबूत कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
इंडोनेशिया एक प्रमुख मुस्लिम राष्ट्र होने के बावजूद भारत के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक तौर पर सदियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह देश हिंद महासागर में भारत का सबसे बड़ा समुद्री पड़ोसी भी है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह मिसाइल डील भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को बड़ी मजबूती देगी।
हाल ही में सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी इस मिसाइल सौदे की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि जकार्ता के साथ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की यह बड़ी डील अब बिल्कुल फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी है।
साउथ चाइना सी में चीन की दादागिरी पर लगेगी नकेल
जियोपॉलिटिकल नजरिए से देखें तो इस डील के बाद आसियान देशों के बीच भारत की भूमिका काफी ज्यादा मजबूत होने वाली है। यह नया रक्षा सौदा सीधे तौर पर दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी और आक्रामक नीति को करारा जवाब देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
चीन की इसी विस्तारवादी नीति से परेशान होकर पहले फिलीपींस और वियतनाम ने भारतीय मिसाइलें खरीदी थीं। अब इंडोनेशिया भी अपनी समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलों को विवादित दक्षिण चीन सागर और नटुना द्वीप समूह के संवेदनशील इलाकों में तैनात करने जा रहा है।
इंडोनेशिया के नए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के कार्यकाल में इस देश ने मिलिट्री हार्डवेयर के लिए भारत का रुख किया है। इससे साफ संदेश मिलता है कि जकार्ता अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए चीन या पश्चिमी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यह रणनीतिक कदम बीजिंग के लिए एक दोहरी बड़ी चेतावनी है।
Author: Pallavi Sharma


