US News: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार अपने चरम पर पहुंच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज पूरी दुनिया को संबोधित करेंगे। उम्मीद है कि वह इस दौरान युद्ध विराम पर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप के लगातार बदलते बयानों ने दुनिया को भारी भ्रम में डाल दिया है। किसी को समझ नहीं आ रहा कि युद्ध खत्म होगा या और भड़केगा। वैश्विक बाजार भी इस भारी असमंजस से डरा हुआ है। ईरान और अमेरिका दोनों तरफ से युद्ध रोकने की बातें जरूर हो रही हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही खौफनाक कहानी बयां कर रही है। ट्रंप एक तरफ अपनी सेना वापस बुलाने की बात करते हैं। वहीं दूसरी तरफ वह खाड़ी में घातक हथियारों और सैनिकों का बड़ा जखीरा भेज रहे हैं।
ट्रंप के दावों और हकीकत में भारी अंतर
ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि वह जल्द ही ईरान से अमेरिकी सेना हटा लेंगे। उन्होंने दो से तीन हफ्ते में सैन्य वापसी का बड़ा दावा किया है। कुछ दिन पहले तक वह ईरान को तबाह करने की धमकियां दे रहे थे। वह खार्ग को जलाने और अंधेरा करने की बात कह रहे थे। अब अचानक उनका हृदय परिवर्तन हो गया है। ट्रंप का कहना है कि वापसी के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना भी जरूरी नहीं है। अब पूरी दुनिया पूछ रही है कि यह बदलाव कैसे आया। क्या ट्रंप जान चुके हैं कि ईरान से टकराने की भारी कीमत चुकानी होगी? या फिर वह दुनिया को किसी नए भ्रम के जाल में फंसा रहे हैं?
ईरान को स्थायी समाधान और पक्की गारंटी की तलाश
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी बातचीत के सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष से फोन पर अहम बातचीत की है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी सूरत में जंग नहीं चाहता। लेकिन वह बिना शर्त इस युद्ध से पीछे हटने को तैयार नहीं है। पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल से दोबारा हमला न करने की पक्की गारंटी मांगी है। ईरान इस युद्ध में हुए भारी नुकसान का पूरा मुआवजा भी चाहता है। साथ ही खाड़ी क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने की बड़ी मांग रखी गई है। ईरान अमेरिका की पंद्रह शर्तों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुका है।
खाड़ी में हथियारों और मरीन कमांडो का भारी जमावड़ा
शांति की इन मीठी बातों के बीच अमेरिका की सैन्य तैयारियां बहुत हैरान करने वाली हैं। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में ‘यूएसएस जार्ज डब्ल्यू बुश’ एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है। इस पर पांच हजार से ज्यादा नौसैनिक और सत्तर लड़ाकू विमान मौजूद हैं। यह कैरियर दो परमाणु रिएक्टरों की ऊर्जा से चलता है। यह बीस साल तक लगातार तैनात रहने की ताकत रखता है। इसके साथ तीन अन्य घातक जंगी जहाज भी भेजे गए हैं। मिडिल ईस्ट में पहले से ही अमेरिका के पचास हजार सैनिक मौजूद हैं। अब पैंतीस सौ मरीन कमांडो और दो हजार पैराट्रूपर्स की नई खेप भी वहां पहुंच चुकी है।
ईरान को वापस पाषाण युग में धकेलने की खुली धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने इसके बाद एक और नया सनसनीखेज दावा पेश किया है। उनका कहना है कि ईरान के नए नेतृत्व ने खुद युद्धविराम की गुहार लगाई है। ट्रंप ने ईरानी राष्ट्रपति को पहले के नेताओं से कहीं ज्यादा बुद्धिमान बताया। लेकिन ट्रंप ने युद्धविराम के लिए एक बेहद कड़ी शर्त भी रख दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खुला और सुरक्षित करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने ईरान को वापस पाषाण युग में धकेलने की सख्त चेतावनी दी है। हालांकि, ईरानी सेना आईआरजीसी ने ट्रंप के इन सभी दावों का तुरंत खंडन कर दिया है।
इजरायल का बड़ा प्लान और अमेरिका की चुनौती
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस युद्ध से पीछे हटने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य ईरान की परमाणु और मिसाइल ताकत को पूरी तरह नेस्तनाबूत करना है। इजरायल वहां पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन चाहता है। नेतन्याहू अब मिडिल ईस्ट के अरब देशों के साथ एक नया और बड़ा गठबंधन बना रहे हैं। इसमें सऊदी अरब, कुवैत, कतर और यूएई जैसे प्रमुख देश शामिल हो सकते हैं। अगर अमेरिका इस युद्ध से हट भी जाता है, तो इजरायल अपना युद्ध जारी रखेगा। लेकिन अमेरिका के लिए खाड़ी देशों को बेसहारा छोड़ना बहुत महंगा साबित होगा। इससे दुनिया भर में अमेरिकी पेट्रो डॉलर का दशकों पुराना वर्चस्व भी हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगा।


