Gujarat News: पिछले साल गुजरात में हुए एअर इंडिया विमान हादसे में चमत्कारिक रूप से बचे एकमात्र यात्री को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए इस विमान में सवार 242 लोगों में से केवल ब्रिटिश नागरिक विश्वशकुमार रमेश ही जीवित बचे थे।
इस खौफनाक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे को लगभग एक साल बीत चुका है। इतने समय तक यह राज बना रहा कि आखिर सीट नंबर 11ए पर बैठे रमेश मौत के मुंह से कैसे बाहर निकले। अब गुजरात पुलिस की आंतरिक जांच रिपोर्ट ने इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठा दिया है।
आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान जब जमीन पर गिरा, तो रमेश अपनी सीट बेल्ट से बंधे हुए ही हवा में बाहर उछल गए थे। उनकी सीट आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) के पास थी, जिसके कारण वह विमान टूटने के दौरान मुख्य बॉडी से दूर जा गिरे।
टेकऑफ के तुरंत बाद विमान का पिछला हिस्सा एक हॉस्टल की मेस से टकराया था। इस जोरदार टक्कर के प्रभाव से रमेश मलबे से करीब 50 फीट दूर कीचड़ वाले मैदान में जा गिरे। इसके कुछ ही सेकंड बाद विमान के अगले हिस्से में भीषण आग लग गई थी।
मिट्टी का टीला बन गया जीवन रक्षक ढाल
जांचकर्ताओं के मुताबिक दुर्घटनास्थल पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण वहां 10 फीट ऊंची मिट्टी की दीवार बनी हुई थी। रमेश खुशनसीबी से इसी मिट्टी के बड़े टीले के पीछे गिरे थे। इस टीले ने धमाके से पैदा हुई भीषण गर्मी और आग की लपटों को पूरी तरह सोख लिया।
इस हादसे में रमेश का कंधा खिसक गया और चेहरे पर मामूली चोटें आईं। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने समय पर इलाज करके उनकी जान बचाई। पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है।
जांच टीम को विमान के दूसरी तरफ का एक नया वीडियो भी मिला है, जो इस क्रैश को बिल्कुल नया नजरिया देता है। हालांकि, मौत को मात देने वाले विश्वशकुमार रमेश को इस चमत्कार की बहुत ही भयानक और दर्दनाक कीमत चुकानी पड़ी है।
इस भयावह विमान हादसे में उनके सगे छोटे भाई अजय की मौके पर ही मौत हो गई थी। पिछले साल अपने परिवार के पास लौटने के बाद से ही रमेश गंभीर शारीरिक चोटों, मानसिक सदमे और भारी आर्थिक तंगी के दौर से लगातार जूझ रहे हैं।
Author: Smit Patel


