चागोस द्वीप पर ट्रंप की नजर: अमेरिका और मॉरीशस की खुफिया डील से बढ़ी भारत की टेंशन, जानिए क्या है पूरा विवाद?

World News: हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह इन दिनों वैश्विक राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है। इस द्वीप समूह पर बरसों से ब्रिटेन का अवैध कब्जा था। भारत और मॉरीशस के कूटनीतिक दबाव के बाद ब्रिटेन इसे वापस लौटाने के लिए तैयार हो गया था।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जता दी है। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने कदम तुरंत पीछे खींच लिए हैं। अब ट्रंप प्रशासन इस बेहद महत्वपूर्ण द्वीप समूह को खरीदने के लिए सीधे मॉरीशस से बड़ी डील करने की तैयारी में है।

डिएगो गार्सिया में छिपा है अमेरिका का असली गेम प्लान

जियो-पॉलिटिक्स के जानकारों के अनुसार इस पूरे विवाद की मुख्य वजह डिएगो गार्सिया द्वीप है। चागोस द्वीप समूह के इसी हिस्से में अमेरिका और ब्रिटेन का एक बहुत बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है। अमेरिका इस रणनीतिक अड्डे का इस्तेमाल हिंद महासागर और पूरे एशिया में सैन्य कार्रवाइयों के लिए करता है।

इराक युद्ध से लेकर ईरान के साथ चल रहे मौजूदा संघर्ष तक में इस बेस की भूमिका अहम रही है। अमेरिका अब इस द्वीप समूह को सीधे खरीदकर अपने सैन्य अड्डे को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना चाहता है। यहां उसके खतरनाक मिसाइलों और ड्रोनों से लैस परमाणु बमवर्षक विमान हमेशा तैनात रहते हैं।

भारत के लिए क्यों खड़ी हो गई है बड़ी रणनीतिक चिंता?

अमेरिका की इस नई कोशिश से भारत के सुरक्षा गलियारों में गहरी चिंता देखी जा रही है। भारत को आशंका है कि इस क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण के बाद हिंद महासागर में अमेरिकी प्रभुत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। भारत चाहता है कि यह पूरा समुद्री क्षेत्र बहुपक्षीय बना रहे।

हिंद महासागर के रास्ते दुनिया का 50 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक सामान गुजरता है। भारत इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति चाहता है। भारत शुरू से ही मॉरीशस के संप्रभुता के दावे का समर्थन करता रहा है। अगर अमेरिका यहां स्थाई रूप से बैठ गया तो स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी।

चीन के खिलाफ सुरक्षा कवच है मॉरीशस

चीनी नौसेना को हिंद महासागर में घेरने के लिए मॉरीशस भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। चीन असल में ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति के तहत भारत के पड़ोसी देशों में सैन्य बंदरगाह बना रहा है। भारत इस चीनी घेराबंदी को तोड़ने के लिए मॉरीशस का इस्तेमाल करता है।

भारत और मॉरीशस के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद मजबूत हैं। मॉरीशस में 70 प्रतिशत से अधिक आबादी भारतीय मूल की है। वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर भी भारतीय अधिकारी तैनात होते हैं। भारत ने मॉरीशस के आगालेगा द्वीप पर अपना लॉजिस्टिक बेस भी बनाया है।

परमानेंट अमेरिकी कब्जे से भारत को होने वाले नुकसान

चागोस द्वीप समूह पर अमेरिका के परमानेंट कब्जे से भारत को कुछ दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं: 1. हिंद महासागर में भारत की स्वतंत्र रणनीतिक क्षमता काफी सीमित हो जाएगी। 2. भविष्य में अमेरिका से संबंध बिगड़ने पर भारत की इस क्षेत्र में पहुंच बहुत मुश्किल हो सकती है।

इस स्थिति का फायदा उठाकर चीन भी मॉरीशस के आसपास अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि अत्यधिक सैन्यीकरण से यह शांत क्षेत्र युद्ध के मैदान में बदल सकता है। अब भारत को बिना अमेरिका को नाराज किए इस बेहद संवेदनशील संकट का कूटनीतिक समाधान ढूंढना होगा।

Pallavi Sharma

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