Bihar News: जीएसटी दरों में कटौती से आम जनता को मिली राहत बहुत जल्द गायब हो गई है। सितंबर 2025 में सैकड़ों जरूरी सामानों पर टैक्स घटने से कीमतें कम हुई थीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पटना के मुख्य बाजारों में हुए ताजा सर्वे के अनुसार रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद एक बार फिर काफी महंगे हो गए हैं।
जीएसटी काउंसिल की बैठक के पांच महीने बाद बढ़ी मुसीबत
जीएसटी काउंसिल ने पिछली बैठक में टैक्स स्लैब बदलकर करीब 375 आवश्यक वस्तुओं को सस्ता किया था। बिस्किट, साबुन, शैंपू और हेयर ऑयल की कीमतों में तुरंत भारी कमी आई थी। जनवरी 2026 तक ग्राहकों को इसका सीधा फायदा मिला, लेकिन मई आते-आते कंपनियों ने सारी राहत वापस छीन ली।
व्यापारिक संगठनों के अनुसार 60 फीसदी से अधिक पैक्ड सामान अब टैक्स कटौती से पहले वाले दिनों से भी ज्यादा महंगे बिक रहे हैं। जनवरी में जो बिस्किट पैकेट 36 रुपये का मिल रहा था, वह अब फिर 40 रुपये का हो गया है। इसके अलावा एक लीटर रिफाइंड तेल का भाव बढ़कर 165 रुपये तक पहुंच गया है।
कंपनियों ने उत्पादन लागत बढ़ने का दिया हवाला
कारोबारियों के अनुसार लेबर कॉस्ट में बढ़ोतरी और प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री के महंगे होने से मैन्युफैक्चरिंग बजट बिगड़ गया है। इसी वजह से कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। कई बड़ी कंपनियों ने दाम सीधे बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन घटाने की नई रणनीति अपनाकर उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है।
इतना ही नहीं, अब ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी टैक्स कटौती का बड़ा फायदा पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है। नए साल की शुरुआत से ही कई प्रमुख वाहन कंपनियों ने कारों और एसयूवी के दामों में तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके कारण मिडिल क्लास परिवारों का मासिक बजट काफी बढ़ गया है।
सरकारी आंकड़ों में भले ही खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। बिहार का जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर रहने के बाद भी आम उपभोक्ता परेशान है। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैकेजिंग मटीरियल की कीमतें घटने पर ही राहत मिलेगी।
Author: Rajesh Kumar


