International News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी कूटनीतिक जंग देखने को मिली। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सच का आईना दिखाकर आतंकवाद के पैरोकार पड़ोसी मुल्क को घुटनों पर ला दिया है।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के गढ़े गए मनगढ़ंत नैरेटिव ‘फितना अल हिंदुस्तान’ की धज्जियां उड़ाते हुए भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। भारतीय राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि आतंकवाद को पालने वाले अब खुद अपने ही बुने जाल में बुरी तरह फंस चुके हैं।
भारत का यह तीखा संबोधन सिर्फ एक कूटनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश को दुनिया के सबसे बड़े मंच पर बेनकाब करने वाली महा-दहाड़ थी। इस कड़े प्रहार से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी राजनयिकों के पास कोई जवाब नहीं बचा था।
आखिर क्या है पाकिस्तान का ‘फितना अल हिंदुस्तान’?
दरअसल, ‘फितना अल हिंदुस्तान’ पड़ोसी मुल्क की एक सोची-समझी कूटनीतिक साजिश और झूठी कहानी है। इसके तहत उसने अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय खूंखार आतंकी संगठनों को यह नया नाम दिया है। पाकिस्तान का आरोप है कि ये गुट भारत के इशारे पर वहां अस्थिरता फैला रहे हैं।
हालांकि, जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबूत दिखाने की बारी आती है, तो इस्लामाबाद के हुक्मरान हमेशा बगलें झांकने लगते हैं। भारत ने यूएन में इसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में फैलाया जाने वाला एक आधिकारिक प्रोपेगैंडा और गुमराह करने वाला घटिया हथकंडा करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘नफरत की एक संगठित फैक्ट्री’ कहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था और अंदरूनी मोर्चों पर मिल रही विफलताओं को छिपाने के लिए भारत विरोधी राग अलापता है।
अपनी ही सरजमीं के विषैले सांपों से डरा इस्लामाबाद
पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए हमेशा बाहरी खतरों का हौआ खड़ा करते हैं। भारत के इस आक्रामक तेवर से पाकिस्तान की खुद की चालें वैश्विक मंच पर उल्टी पड़ने लगी हैं। वह लगातार खुद को आतंकवाद पीड़ित दिखाने का ढोंग करता है।
भारत ने इस दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले आज खुद अपनी ही सरजमीं पर पनप रहे विषैले सांपों से डरे हुए हैं। वित्तीय संकट के बीच चौतरफा घिरे पाकिस्तान के पास भारत के ठोस हमलों का कोई जवाब नहीं है।
भारतीय राजदूत ने केवल सीमा पार आतंकवाद ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों में हुई बेगुनाह नागरिकों की मौतों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि रमजान के पाक महीने में हवाई हमले करके मासूमों को मारना पाखंड की पराकाष्ठा है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी हिंसक हमले को आतंकवाद विरोधी सैन्य अभियान का नाम देकर कोई भी देश अपने गुनाहों से बरी नहीं हो सकता। भारत की इस बेबाक बयानबाजी ने इंटरनेशनल कम्युनिटी के सामने पाकिस्तान के पाखंडी चेहरे को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
Author: Pallavi Sharma


