World News: पश्चिम एशिया में फैला भीषण संघर्ष अब पूरी दुनिया को भुखमरी की ओर धकेल रहा है। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी जारी की है कि ईंधन और परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्यान्न की कीमतें आसमान छू रही हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर फंड की भारी कमी के कारण सहायता एजेंसियां लाचार दिखाई दे रही हैं।
ईरान पर फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव फैला दिया। यह क्षेत्रीय संघर्ष अब लेबनान तक पहुंच चुका है। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं। जहाजों को अब मजबूरन लंबा और महंगा रास्ता चुनना पड़ रहा है।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला और तेल की कीमतें प्रभावित
इस बड़े व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रवाह और आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। कच्चे तेल की कीमतें मार्च की शुरुआत से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। डब्ल्यूएफपी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर तेल इस स्तर पर रहा, तो साढ़े चार करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो जाएंगे।
अब वही भयावह स्थिति दुनिया के सामने सच बनकर खड़ी हो रही है। इस आर्थिक मंदी और ईंधन संकट का सबसे गंभीर असर अफगानिस्तान, सोमालिया और श्रीलंका जैसे देशों पर पड़ रहा है। इन देशों के गरीब परिवार बढ़ती लागत, भोजन की किल्लत और रोजगार छिनने के कारण भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।
सोमालिया और अफगानिस्तान में भुखमरी का बड़ा खतरा
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार सोमालिया में इस साल करीब 65 लाख लोगों को गंभीर भुखमरी का सामना करना पड़ेगा। यह देश की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। इसी तरह युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में स्थिति और बदतर है, जहां 1.74 करोड़ लोग भोजन संकट की चपेट में आ सकते हैं।
अगर यह वैश्विक संकट लंबे समय तक ऐसे ही जारी रहा, तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। इसके कारण सोमालिया में 25 लाख और अफगानिस्तान में 23 लाख अतिरिक्त लोग भुखमरी के जाल में फंस जाएंगे। ये दोनों ही विकासशील देश अपनी ऊर्जा और खाद्य जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशी आयात पर निर्भर हैं।
Author: Pallavi Sharma


