नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक गुप्त दावे से मचा भारी बवाल, बोले- हमने भी भारत की जमीन पर कर रखा है कब्जा

International News: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में एक ऐसा विवादित दावा किया है, जिसने उनके अपने ही देश में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। नेपाल के इस नए दावे के बाद अब दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद गरमा गया है।

नेपाल की सरकार हमेशा से भारत पर अपनी जमीन हड़पने का आरोप लगाती रही है। हालांकि, इस साल की शुरुआत में देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने 35 वर्षीय बालेन शाह ने पहली बार माना कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्रों पर अपना अवैध कब्जा जमाया हुआ है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 11 मई से शुरू हुए संसद सत्र के दौरान अपने पहले ऐतिहासिक संबोधन में यह चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों से जुड़ा सीमा विवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है।

पीएम शाह ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद ही इस नए तथ्य का पता चला है। भारत ने न केवल नेपाली क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई रणनीतिक जगहों पर भारतीय संप्रभु क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा किया हुआ है।

उन्होंने इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों को इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और वरिष्ठ विशेषज्ञों की मदद लेने का एक नया सुझाव दिया। बालेन शाह ने यह भी दावा किया कि काठमांडू ने इस संवेदनशील मामले को चीन और ब्रिटेन के सामने उठाया है।

संसद में प्रधानमंत्री के बयान का विपक्ष ने किया तीखा विरोध

नेपाल के प्रधानमंत्री का यह विवादित बयान सामने आते ही काठमांडू की संसद में भारी हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सांसदों ने पीएम की इन टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया। विपक्षी नेताओं ने इन विवादित बयानों को संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड से तुरंत हटाने की मांग की।

नेपाली कांग्रेस की बासना थापा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश मल्ला ने इस बयान का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या तो भारत की जमीन पर कब्जे के पुख्ता सबूत पेश करें, या फिर देश की संसद से बिना शर्त अपना बयान वापस लें।

भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलांबर आचार्य ने भी पीएम के इस दावे को पूरी तरह हवा-हवाई बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शाह के पास इस बात की कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है। दोनों देशों के बीच 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझ चुका है।

पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय के अनुसार नेपाल द्वारा भारत की किसी भी जमीन पर आधिकारिक कब्जे का कोई दस्तावेजी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। भारत ने भी कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है। इसके बाद प्रधानमंत्री की चौतरफा किरकिरी हो रही है।

विवाद बढ़ने के बाद नेपाल सरकार को देनी पड़ी सफाई

इस बयान पर चौतरफा घिरने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दीं। मंत्रालय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर दावा किया कि प्रधानमंत्री वास्तव में सीमा पर बने नो-मैन्स लैंड में होने वाले स्थानीय अतिक्रमण की बात कर रहे थे।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नदी सीमाओं वाले क्षेत्रों में फिक्स्ड बाउंड्री प्रिंसिपल लागू होता है। इस वजह से तकनीकी रूप से भारतीय हिस्से में आने वाली कुछ जमीन पर नेपाली नागरिक खेती कर रहे हैं। वहीं नेपाल के हिस्से वाली कुछ जमीन का उपयोग भारतीय कर रहे हैं।

Author: Pallavi Sharma

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