ऊना जिला परिषद चुनाव में भाजपा का प्रचंड दबदबा, कांग्रेस के गढ़ ढहे, मुकेश अग्निहोत्री ने बचाई लाज

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने प्रचंड जीत हासिल की है। पार्टी ने कुल 17 वार्डों में से 11 सीटों पर शानदार कब्जा जमाया है। इस बड़ी जीत से जिला परिषद पर भाजपा का नियंत्रण फिर तय हो गया है।

इस चुनावी मुकाबले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भारी निराशा हाथ लगी है। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार केवल 5 सीटों पर ही सिमट कर रह गए हैं। वहीं चुनाव परिणाम में एक सीट पर भाजपा के ही बागी उम्मीदवार ने बाजी मारी है।

देर रात घोषित नतीजों में मुबारिकपुर से पवनजीत और कुठेड़ा खैरला से अरूणलता विजयी रहे हैं। इनके साथ ही सोहारी से योगराज योगी, लठियाणी से अनीता देवी, चताड़ा से अनु ठाकुर और देहलां अप्पर से अविनाश मैनन ने भी शानदार जीत दर्ज की है।

रायपुर सहोड़ा से बिंदु शर्मा, पंजावर से इंदु बाला, अम्बोटा से पवन नम्बरदार, चलेट से आरती देवी और भंजाल लोअर से गुरमुख सिंह ने जीत हासिल की है। कुटलैहड़ के धनेत से पूर्व मंत्री वीरेन्द्र कंवर समर्थक चंचला देवी ने जीत पाई है।

मुकेश अग्निहोत्री के हरोली क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा बरकरार

इस चुनाव में कांग्रेस समर्थित विजेताओं में ठठल से सरवण सिंह और टक्का से सुमित शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा बाथु से ज्योति बाला, दुलैहड़ से सुलिन्द्र पाल कौर और हरोली से केवल सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की है।

चुनाव में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने गृह क्षेत्र हरोली में कांग्रेस का दबदबा मजबूत रखा है। हरोली में एक सीट छोड़कर बाकी सभी वार्डों और ग्राम पंचायतों में उनके समर्थकों ने शानदार जीत हासिल कर पार्टी की लाज बचाई है।

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी को सबसे करारी शिकस्त ऊना विधानसभा क्षेत्र में झेलनी पड़ी है। ऊना में कांग्रेस समर्थित एक भी चेहरा चुनाव नहीं जीत सका। आपसी तालमेल की कमी और कमजोर रणनीति के कारण कांग्रेस को यहां करारी हार मिली है।

ऊना में भाजपा के वरिष्ठ विधायक सतपाल सिंह सत्ती की चुनावी रणनीति पूरी तरह कामयाब रही। उन्होंने जमीनी स्तर पर बेहतर प्रचार करके अपनी टीम को मजबूत किया। इसके चलते भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने ऊना की सभी सीटों पर परचम लहरा दिया।

कुटलैहड़ और चिंतपूर्णी में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को झटका

कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में जनता ने संतुलन बनाने का काम किया है। यहां विधायक विवेक शर्मा, भाजपा के पूर्व मंत्री वीरेन्द्र कंवर और पूर्व विधायक देवेन्द्र भुट्टो समर्थित उम्मीदवारों को एक-एक सीट मिली है। यहां जिला कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे शोभित गौतम हार गए।

चिंतपूर्णी क्षेत्र में कांग्रेस विधायक सुदर्शन बबलू को मतदाताओं ने बड़ा झटका दिया है। उन्हें केवल उनके गृहक्षेत्र ठठल से ही सफलता मिली है। उनके गृह पंचायत क्षेत्र सोहारी और कुठेड़ा खैरला वार्ड में तमाम सरकारी प्रचार तंत्र के बावजूद कांग्रेस हार गई।

गगरेट विधानसभा क्षेत्र में आंतरिक खटपट के बावजूद भाजपा समर्थितों का दबदबा देखने को मिला है। यहां कांग्रेस विधायक राकेश कालिया के समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है। कालिया के अपने गृहक्षेत्र लोअर भंजाल से भी भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजयी रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा चेतावनी भरा संकेत है। जिला परिषद के साथ-साथ अधिकांश ग्राम पंचायतों में भी भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। अब कांग्रेस को अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा फेरबदल करना होगा।

Author: Sunita Gupta

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