World News: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से एक बेहद निराशाजनक और भावुक करने वाली खबर सामने आई है। वहां लगातार चौथे वर्ष भी लड़कियां विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। तालिबान संचालित राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण ने गुरुवार से देश की इस प्रतिष्ठित परीक्षा का तीसरा चरण शुरू कर दिया है।
स्थानीय मीडिया आउटलेट खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, काबुल विश्वविद्यालय में इस परीक्षा को देने के लिए हजारों पुरुष उम्मीदवार पहुंचे। इन परीक्षाओं का आयोजन शुक्रवार को भी जारी रहेगा। हालांकि, शिक्षा के इस सबसे बड़े मंच से देश की आधी आबादी यानी छात्राओं को पूरी तरह गायब रखा गया है।
लाखों छात्र शामिल, पर छात्राओं के लिए दरवाजे बंद
राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के प्रशासनिक और तकनीकी उप प्रमुख रहीमउल्लाह हक्कानी ने इस संबंध में कुछ आंकड़े साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान में आयोजित परीक्षा के पहले तीन चरणों में 110,000 से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। प्रशासन को उम्मीद है कि चौथे चरण के बाद यह संख्या 120,000 तक पहुंच जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा के चौथे चरण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आठ जून तक खुली रहेगी। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में लड़कियों के लिए कोई जगह नहीं है। सुरक्षा और प्रशासनिक दावों के बीच तालिबान सरकार लगातार युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर देने की बात तो कर रही है, पर महिलाओं को दरकिनार किया जा रहा है।
छठी कक्षा के आगे पढ़ाई पर है सख्त पाबंदी
गौरतलब है कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता हथियाने के बाद से ही तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। तालिबान शासन ने लड़कियों को छठी कक्षा से आगे पढ़ने पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इसी दमनकारी नीति के कारण देश की लाखों होनहार छात्राएं इस परीक्षा से वंचित हैं।
अफगानिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और किसी भी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए ‘कंकोर’ परीक्षा पास करना बेहद अनिवार्य है। लेकिन पिछले चार वर्षों से लगातार लग रहे इन कड़े प्रतिबंधों ने अफगान लड़कियों के भविष्य और उनके डॉक्टर, इंजीनियर या प्रोफेसर बनने के सपनों को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
Author: Pallavi Sharma


