World News: दुनिया के सबसे ठंडे और शुष्क महाद्वीप अंटार्कटिका को लेकर अक्सर कई तरह के रहस्य सामने आते रहते हैं। इस बर्फीले इलाके में कोई भी स्थायी इंसानी आबादी नहीं रहती है। यहां केवल वैज्ञानिक और शोधकर्ता ही अस्थायी तौर पर अपने रिसर्च सेंटर्स में समय बिताते हैं।
अंटार्कटिका का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा हमेशा 1.6 किलोमीटर मोटी बर्फ की चादर से ढका रहता है। सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर जाता है। कई हफ्तों तक यहां सूरज की रोशनी की एक किरण भी नहीं पहुंचती है।
अंटार्कटिका की नागरिकता का पूरा सच जानिए
इस महाद्वीप में हजारों वैज्ञानिक और उनके सहयोगी कर्मचारी सालभर अलग-अलग स्टेशनों पर रहते हैं। इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि अंटार्कटिका के 11 स्थायी नागरिक मौजूद हैं। हालांकि रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के जानकार इसे पूरी तरह एक अफवाह मानते हैं।
दरअसल अंटार्कटिका में कोई भी व्यक्ति स्थायी रूप से अपना घर नहीं बसा सकता है। भीषण ठंड के कारण यहां जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण है। सर्दियों में तो इन दूरदराज के रिसर्च स्टेशनों पर केवल मुट्ठी भर लोग ही अपनी ड्यूटी के लिए रुकने का साहस जुटा पाते हैं।
आखिर कौन हैं वो 11 बच्चे जिनका हुआ जन्म
इस महाद्वीप पर अलग-अलग समय पर कुल 11 बच्चों का जन्म जरूर हुआ था। साल 1970 और 1980 के दशक में अर्जेंटीना और चिली ने इस इलाके पर अपना क्षेत्रीय दावा मजबूत करने की कोशिश की थी। इसी राजनीतिक रणनीति के तहत उन्होंने वहां गर्भवती महिलाओं को भेजा था।
अर्जेंटीना ने साल 1977 के अंत में अपने रिसर्च स्टेशन ‘एस्पेरांजा बेस’ पर एक गर्भवती महिला को भेजा। इसके बाद 7 जनवरी 1978 को वहां एमिलियो मार्कोस पाल्मा का जन्म हुआ। एमिलियो अंटार्कटिका की धरती पर पैदा होने वाले दुनिया के पहले इंसान बने थे।
चिली ने भी भेजा था अपना शादीशुदा जोड़ा
अर्जेंटीना की देखा-देखी चिली ने भी अपने बेस पर एक शादीशुदा जोड़े को बच्चा पैदा करने के मिशन पर भेजा था। इस तरह अलग-अलग सालों में अर्जेंटीना के बेस पर 8 और चिली के रिसर्च बेस पर 3 बच्चों ने इस बर्फीली दुनिया में जन्म लिया था।
इन 11 बच्चों के जन्म के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नागरिकता को लेकर लंबी बहस चली। हालांकि अंतरराष्ट्रीय संधि और कड़े कानूनों के तहत अंटार्कटिका में पैदा होने वाले किसी भी व्यक्ति को वहां की नागरिकता या जमीन का अधिकार नहीं दिया जा सकता है।
माता-पिता के देशों की ही मिली कानूनी नागरिकता
अंटार्कटिका को किसी भी एक देश की बपौती नहीं माना गया है। इसलिए वहां जन्मे इन सभी 11 बच्चों को अंततः उनके माता-पिता के मूल देशों की ही कानूनी नागरिकता मिली। अर्जेंटीना के बेस पर पैदा हुए बच्चों को अर्जेंटीना और चिली वालों को चिली का पासपोर्ट मिला।
इस अनोखे महाद्वीप के कुछ इलाकों में पिछले 20 लाख सालों से बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी है। ऐसे कठोर मौसम में बच्चों को जन्म दिलाना केवल एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा था। आज भी यह महाद्वीप पूरी तरह से वैश्विक नागरिकता के दावों से मुक्त है।
Author: Pallavi Sharma


