ट्रंप की ‘पागलपन की रणनीति’ से खौफ में दुनिया! जानिए ईरान के खिलाफ अमेरिका के बड़े यू-टर्न का असली सच

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना रुख अचानक बदल लिया है। पहले वह पूरी सभ्यता को खत्म करने जैसी भारी धमकी दे रहे थे। अब उन्होंने अचानक युद्धविराम का राग अलापना शुरू कर दिया है। ट्रंप का यह यू-टर्न पूरी दुनिया में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे अमेरिका की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। पश्चिम एशिया के भारी तनाव के बीच यह कदम कई नए सवाल खड़े करता है।

पश्चिम एशिया में लगातार गहराता युद्ध का संकट

इजरायल और लेबनान के बीच मौजूदा हालात बिल्कुल भी शांत नहीं हैं। इजरायली सेना लगातार दक्षिणी लेबनान में अपना कड़ा सैन्य अभियान चला रही है। दूसरी तरफ ईरान ने भी खाड़ी देशों के कई अहम तेल ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ट्रंप के युद्धविराम वाले बयान का असली असर एक बड़ा सवाल बन गया है। यह बेहद गंभीर परिस्थिति ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट को दोबारा एक भयंकर जंग की तरफ धकेल सकती है।

शीत युद्ध की खतरनाक ‘मैडमेन थ्योरी’ की वापसी

ट्रंप के इस हैरान करने वाले व्यवहार के पीछे मशहूर “मैडमेन थ्योरी” काम कर रही है। इसकी शुरुआत शीत युद्ध के पुराने दौर में हुई थी। इस थ्योरी के तहत नेता खुद को बेहद कट्टर और अप्रत्याशित दिखाते हैं। इससे सामने वाला दुश्मन बुरी तरह डरकर जल्दी समझौता कर लेता है। नेता जानबूझकर ऐसा संदेश देते हैं कि वे कुछ भी कर सकते हैं। दुश्मन पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए यह एक अचूक कूटनीतिक हथियार माना जाता है।

ट्रंप की कूटनीति में अप्रत्याशितता और अतिवाद का मेल

मनोवैज्ञानिक इस रणनीति को अप्रत्याशितता और अतिवाद में बांटते हैं। डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार इन दोनों खतरनाक चीजों का सटीक मिश्रण है। वे कभी भयंकर धमकी देते हैं तो कभी शांति की बात करते हैं। अप्रत्याशित रवैये में उनके अगले कदम का बिल्कुल अंदाजा नहीं होता है। अतिवाद में उन्हें विनाश की कोई परवाह नहीं होती है। ट्रंप जब सभ्यता खत्म करने की धमकी देते हैं, तो यह उनके अतिवाद को स्पष्ट रूप से दिखाता है।

पुतिन से लेकर किम जोंग तक नेताओं का इतिहास

दुनिया के कई अन्य बड़े नेताओं ने भी ऐसी आक्रामक इमेज बनाने की भरपूर कोशिश की है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन इसमें बुरी तरह असफल रहे थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के दौरान परमाणु हमले की धमकी देकर ऐसी ही छवि बनाने का प्रयास किया था। हालांकि आज उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन सबसे बड़े मैडमेन नेता माने जाते हैं। वे दुनिया की परवाह किए बिना अपने क्रूर फैसलों के लिए कुख्यात हैं।

डिजिटल युग में रणनीति का असर और अमेरिका का नुकसान

डिजिटल दौर में मैडमेन थ्योरी को लागू करना बहुत मुश्किल है। सोशल मीडिया के कारण नेताओं का हर बयान तुरंत वायरल हो जाता है। इस आक्रामक कूटनीति से दुश्मन पर भारी दबाव बनता है, लेकिन आपसी भरोसा बिल्कुल खत्म हो जाता है। ईरान भी इसी वजह से अमेरिका पर भरोसा नहीं कर रहा है। ट्रंप की यह नीति फौरी फायदा दे सकती है। इसके विपरीत भविष्य में इस अस्थिर रणनीति से वैश्विक मंच पर अमेरिका बहुत कमजोर हो जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भरोसे की अहमियत

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी देश की सफलता आपसी भरोसे पर निर्भर करती है। सफल कूटनीति के लिए स्थायी और विश्वसनीय नीति होना बेहद जरूरी है। ट्रंप की बार-बार नियम तोड़ने वाली यह अजीब आदत अमेरिका के पुराने सहयोगियों को दूर कर सकती है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का साफ मानना है कि डराने की यह राजनीति हमेशा सफल नहीं होती है। ट्रंप के बाद भी उनकी इस मैडमेन थ्योरी के गंभीर परिणाम अमेरिका को लंबे समय तक भुगतने पड़ेंगे।

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