Washington News: अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक शांति समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि तेहरान अब कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि इस समझौते को जमीन पर पूरी तरह लागू कराने के लिए एक बेहद सख्त निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरान अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय शर्तों का कड़ाई से पालन करे।
डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि इस ऐतिहासिक पहल से दोनों देशों के कड़वे रिश्तों में बड़ा सुधार होगा। हालांकि, उन्होंने तेहरान को सख्त चेतावनी भी दी है कि अगर यह समझौता किसी वजह से विफल रहा, तो मध्य पूर्व के हालात फिर पहले की तरह ही भयानक हो सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि उम्मीद है कि हमारे संबंध भविष्य में अच्छे रहेंगे, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम फिर वहीं पहुंच जाएंगे जहां से शुरुआत हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी जब वह शर्तें पूरी करेगा।
यूरेनियम संवर्धन की समय सीमा पर अब भी फंसा है पेंच
ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। न्यूयार्क टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद रखे।
दूसरी ओर, तेहरान इस पाबंदी के लिए अधिकतम 10 वर्ष की अवधि पर ही अड़ा हुआ है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे बीच का रास्ता निकालते हुए 15 वर्ष के समझौते पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, ईरान को केवल गैर-सैन्य और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही सीमित संवर्धन की अनुमति होगी।
बातचीत के बीच दो रात करनी पड़ी थी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत बहुत अच्छी चल रही थी, लेकिन इसी बीच अमेरिका को दो रात मजबूरन सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि हमारे बीच अच्छा तालमेल बन रहा था, लेकिन मुझे दुख है कि हमें वापस जाकर हमला करना पड़ा।
इस बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस समझौते पर एक बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम से जुड़े इस अंतिम समझौते की अमेरिकी संसद में गहन समीक्षा की जाएगी और पूरी संतुष्टि के बाद ही इसे अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।
Author: Pallavi Sharma


