ऑस्ट्रियाई राष्ट्रपति का ट्रंप पर बड़ा हमला: बोले- ‘उम्रदराज लोग खुद को ईसा मसीह समझने लगते हैं’

Vienna News: ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वान डेर बेलेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की कार्यशैली और उनके विवादित बयानों पर तीखा प्रहार किया है। वान डेर बेलेन ने ट्रंप के निर्णयों को असामान्य बताते हुए कहा कि स्वेच्छाचारी शासक अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए अक्सर सत्य को निशाना बनाते हैं। उन्होंने ट्रंप की बढ़ती उम्र की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की। ऑस्ट्रियाई राष्ट्रपति ने कहा कि उम्रदराज लोग अक्सर कई तरह के भ्रम का शिकार हो जाते हैं और स्वयं को मसीहा समझने लगते हैं।

तकनीकी विकास और फर्जी खबरों के जाल पर जताई चिंता

पूरी दुनिया से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति वान डेर बेलेन ने आधुनिक तकनीक के खतरों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक के निरंतर अपग्रेड होने से ‘फेक न्यूज’ यानी झूठी खबरों के प्रसार के लिए नए और बड़े साधन उपलब्ध हो गए हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, वर्तमान समाज को सही और विश्वसनीय सूचनाओं की जितनी आवश्यकता आज है, उतनी पहले कभी नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सूचनाओं के इस दौर में समाचार एजेंसियों की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है।

पत्रकारिता के लिए ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ की दी सलाह

खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति वान डेर बेलेन ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी खबर को सार्वजनिक करने से पहले उस पर किसी निष्पक्ष तीसरे पक्ष (Third Party) की स्वीकृति की मुहर अनिवार्य होनी चाहिए। बेलेन के मुताबिक, यह तीसरा पक्ष पूरी तरह से राजनीति से परे और समर्थकों की अंधभक्त भीड़ से अलग होना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की तटस्थ निगरानी से ही समाज तक बिना किसी मिलावट के सही खबरें पहुंचाई जा सकती हैं।

सूचनाओं की सत्यता परखने के लिए बताया ‘थ्री-स्टेप फॉर्मूला’

पत्रकारों से संवाद के दौरान ऑस्ट्रियाई राष्ट्रपति ने मीडिया जगत को एक खास सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हर सूचना की सत्यता को कम से कम तीन बार अलग-अलग स्तरों पर परखा जाना चाहिए। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही किसी खबर को जनता के बीच सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सूचना की प्रामाणिकता को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा आधार बताया। बेलेन ने आगाह किया कि अगर सूचनाओं की जांच में कोताही बरती गई, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक साबित होगा।

प्रोफेसर से राष्ट्रपति तक: दक्षिणपंथ के मुखर विरोधी रहे हैं बेलेन

एलेक्जेंडर वान डेर बेलेन का राजनीतिक और शैक्षणिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है। वह अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रह चुके हैं और लंबे समय तक वामपंथी ‘ग्रींस पार्टी’ का नेतृत्व किया है। राजनीतिक विचारधारा के स्तर पर वह शुरू से ही दक्षिणपंथी संगठनों और उनकी नीतियों के कट्टर आलोचक रहे हैं। ऑस्ट्रिया के भीतर भी वह सत्तारूढ़ अति दक्षिणपंथी ‘फ्रीडम पार्टी’ के नेतृत्व वाले गठबंधन की कई नीतियों का सार्वजनिक रूप से विरोध करते आए हैं। उनका यह ताजा बयान वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है।

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