World News: यूक्रेन के विनाशकारी ड्रोन हमलों ने रूस के तेल साम्राज्य को हिलाकर रख दिया है। इन हमलों से रूस के तेल उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते युद्ध के इस दौर में तेल निर्यात कर मोटा मुनाफा कमाने की क्रेमलिन की बड़ी आर्थिक योजना को तगड़ा झटका लगा है।
बीती 29 मई को यूक्रेन द्वारा किए गए एक सटीक ड्रोन हमले में वोल्गोग्रेड स्थित रूस की प्रमुख ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था। इस हमले में रिफाइनरी के मुख्य हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद वहां तेल शोधन (रिफाइनिंग) का काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
इस भीषण हमले के कारण रिफाइनरी परिसर में भयंकर आग लग गई थी, जिसे काफी मशक्कत के बाद बुझाया गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, रिफाइनरी को हुआ नुकसान इतना बड़ा है कि इसे ठीक होने में महीनों का समय लगेगा।
रूस के कुल तेल शोधन का 5 फीसदी हिस्सा हुआ ठप
वोल्गोग्रेड की यह रिफाइनरी रूसी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। साल 2024 में इस अकेले संयंत्र ने करीब एक करोड़ 35 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का शोधन किया था। यह विशाल मात्रा पूरे रूस में होने वाले कुल कच्चे तेल के शोधन का लगभग पांच प्रतिशत है।
दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हथियारों की आपूर्ति को लेकर एक बड़ा दावा किया है। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका इस समय पर्याप्त संख्या में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन नहीं कर पा रहा है। अमेरिका मौजूदा समय में हर महीने केवल 60 से 65 मिसाइलें ही बना रहा है।
जेलेंस्की के अनुसार, अमेरिकी मिसाइलों के कम उत्पादन के कारण दुनिया के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है। इसके विपरीत, रूस ने अपनी युद्धक जरूरतों को देखते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन काफी बढ़ा दिया है। जेलेंस्की ने अमेरिकी संसद से मिसाइल उत्पादन बढ़ाने की गुहार लगाई है।
Author: Pallavi Sharma

