ढाका लौटते ही गिरफ्तार होंगी शेख हसीना, बांग्लादेश सरकार ने कहा- ‘सरेंडर का मौका नहीं, सीधे जेल भेजेंगे’

Dhaka News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वतन वापसी की खबरों के बीच वहां की नई सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि हसीना को ढाका कदम रखते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उन्हें आत्मसमर्पण का कोई मौका नहीं मिलेगा।

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साल 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक तख्तापलट के बाद से ही शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार को स्पष्ट किया कि हसीना के लिए सरेंडर की कोई गुंजाइश नहीं होगी। उन्हें आते ही हिरासत में लिया जाएगा।

गृहमंत्री ने बताया कि अदालत की तरफ से दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। वहीं, विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भी कहा कि यदि वह आती हैं, तो मौजूदा कानून के अनुसार ही सख्त कदम उठाए जाएंगे और उन्हें सीधे जेल जाना होगा।

दिसंबर में पार्टी नेताओं के साथ बांग्लादेश लौटने की है योजना

इससे पहले एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा था कि वह अपनी पार्टी अवामी लीग के सदस्यों के साथ बांग्लादेश वापस जाएंगी और वहां की अदालत का सामना करेंगी। उन्होंने दिसंबर के आसपास मुल्क वापसी की योजना बनाई है। उन्हें पता है कि वहां उनकी जान को खतरा हो सकता है।

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हसीना ने कहा था कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को वहां दमन का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए वे वापस जाना चाहती हैं। गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक आंदोलन के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और वे सुरक्षित भारत आ गई थीं।

अदालत से मिली है मौत की सजा, भारत से प्रत्यर्पण की मांग

पिछले वर्ष नवंबर में ढाका की एक विशेष अदालत ने 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ मानते हुए शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद से ही बांग्लादेश सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की लगातार मांग कर रही है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने कहा कि देश के लोग चाहते हैं कि हसीना को मिली मौत की सजा बरकरार रहे और उस पर अमल किया जाए। दूसरी तरफ, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और प्रत्यर्पण एक कानूनी विषय है।

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