रूस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: तीन दिवसीय परमाणु अभ्यास शुरू, 64 हजार सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरण शामिल

Moscow News: वैश्विक तनाव के बीच रूस ने मंगलवार को तीन दिवसीय व्यापक परमाणु हथियारों का परीक्षण अभ्यास शुरू कर दिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य देश के परमाणु हथियारों की तत्परता और उन्हें न्यूनतम समय में सक्रिय करने की क्षमता का परीक्षण करना है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की यह अब तक की सबसे बड़ी परमाणु कवायद मानी जा रही है।

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इस बड़े पैमाने के सैन्य अभ्यास में रूस की तीनों सेनाओं की विभिन्न शाखाएं हिस्सा ले रही हैं। रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस अभियान में कुल 64,000 सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें रूस की उत्तरी और प्रशांत फ्लीट के साथ-साथ रॉकेट फोर्स के सदस्य भी शामिल हैं, जो परमाणु हथियार दागने की स्थितियों का वास्तविक अभ्यास कर रहे हैं।

अभ्यास की विशालता और सामरिक ताकत

रूसी परमाणु अभ्यास में हथियारों का एक बड़ा जखीरा तैनात किया गया है, जो रूस की सामरिक क्षमता को दर्शाता है। अभ्यास के मुख्य आंकड़ों पर एक नजर: सैन्य उपकरण संख्या मिसाइल लांचर 200 से अधिक लड़ाकू विमान 140 (विभिन्न श्रेणी) युद्धपोत 73 परमाणु पनडुब्बियां 21 (13 सामान्य + 8 रणनीतिक)

इस अभ्यास में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ परमाणु हथियार दागने की सटीकता का परीक्षण किया जा रहा है। रूसी रक्षा तंत्र का मुख्य ध्यान ‘रिस्पॉन्स टाइम’ को कम करने और किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देने की क्षमता को निखारने पर है। यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया और यूरोप में भू-राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।

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बेलारूस की भूमिका और यूरोपीय सुरक्षा

इस परमाणु अभ्यास में बेलारूस में तैनात रूसी रॉकेट फोर्स के सदस्यों की भागीदारी ने यूरोप में नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने बेलारूस में परमाणु हथियारों की तैनाती की है, जो यूरोपीय देशों के काफी करीब है। विशेषज्ञों का मानना है कि वहां से हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों के माध्यम से कुछ ही मिनटों में लक्ष्यों को भेदना संभव है।

रूस का यह सैन्य प्रदर्शन सीधे तौर पर वैश्विक शक्तियों को अपनी परमाणु क्षमता और युद्ध तत्परता का संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि रूस इसे एक नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां इस पर बारीक नजर रखे हुए हैं। अगले तीन दिनों तक चलने वाला यह अभ्यास रूस की भविष्य की सामरिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

Author: Pallavi Sharma

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