सिंधु जल संधि स्थगित होने से बौखलाया पाकिस्तान, भारत को घेरने के लिए इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आज

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Islamabad News: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। भारत के इस कड़े फैसले से पड़ोसी देश पाकिस्तान पूरी तरह बौखलाया हुआ है। अब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ वैश्विक मंच पर कूटनीतिक दबाव बनाने की एक नई चाल चली है।

कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्लामाबाद में मेगा इवेंट आज

खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान मंगलवार को इस्लामाबाद में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस मेगा इवेंट के जरिए पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने जल बंटवारे के मुद्दे पर रोएगा। वह इस दशकों पुराने समझौते को दोबारा बहाल करने के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा।

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इस वीआईपी सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर मुख्य रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा शीर्ष सैन्य अधिकारी और कई विदेशी वक्ता भी हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान इस मंच पर अपनी नई वाटर डिप्लोमेसी स्ट्रेटेजी को पूरी दुनिया के सामने पेश करने की तैयारी में है।

भारत पर जल आतंकवाद का झूठा आरोप लगाने की फिराक में पाक

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कार्यक्रम में सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान अपना बेहद सख्त रुख दिखाएगा। वह भारत की जल नीति के खिलाफ कानूनी और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करेगा। इस सम्मेलन में पाकिस्तान भारत पर जल आतंकवाद का झूठा आरोप लगाने की फिराक में भी जुटा हुआ है।

भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद इस द्विपक्षीय समझौते को पूरी तरह सस्पेंड कर दिया था। पाकिस्तान का तर्क है कि सिंधु नदी प्रणाली उसकी कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। द्विपक्षीय बातचीत बंद होने के कारण अब वह इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना चाहता है।

आंतरिक आर्थिक संकट और जनता का ध्यान भटकाने की बड़ी चाल

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री शरीफ और जनरल मुनीर का एक साथ आना उनकी रणनीतिक मजबूरी को दर्शाता है। वे दिखाना चाहते हैं कि देश का नागरिक और सैन्य नेतृत्व इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है। पाकिस्तान अब इस जल विवाद को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

खुफिया सूत्रों का मानना है कि इस पूरे अभियान का एक घरेलू राजनीतिक एजेंडा भी है। पाकिस्तान सरकार अपने देश में बढ़ती पानी की किल्लत, जर्जर नहर नेटवर्क और भीषण आर्थिक संकट से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। वह इस सम्मेलन के बाद भारत के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय रोडमैप भी जारी कर सकती है।

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