धर्मशाला की विशेष अदालत ने हेरोइन तस्करी मामले में महिला को सुनाई एक वर्ष की सजा, दस हजार रुपये का लगाया जुर्माना

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Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के तहत धर्मशाला की एक विशेष अदालत ने नशा तस्करी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने हेरोइन यानी चिट्टे की तस्करी के मामले में आरोपी महिला कल्पना देवी को दोषी करार दिया है।

विशेष न्यायाधीश डॉ. अरविंद मल्होत्रा की अदालत ने छन्नी गांव की रहने वाली दोषी महिला को एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का नकद जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न चुकाने पर उसे अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

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राष्ट्रीय राजमार्ग पर गश्त के दौरान पुलिस ने पकड़ा था नशा

यह मामला 6 मई 2021 को पुलिस थाना इंदौरा के तहत आने वाले मिलवां क्षेत्र में सामने आया था। उस दिन पुलिस की एक विशेष टीम राष्ट्रीय राजमार्ग पर रूटीन गश्त और अपराध नियंत्रण के लिए मुस्तैदी से तैनात थी। तभी सामने से एक महिला आती दिखी।

पुलिस टीम को अचानक सामने देखकर महिला बुरी तरह घबरा गई। उसने आनन-फानन में अपने कपड़ों के भीतर छिपाया हुआ एक पॉलीथीन पैकेट सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए महिला को मौके पर ही तुरंत दबोच लिया।

पैकेट की जांच में बरामद हुई थी छह ग्राम से ज्यादा हेरोइन

संदेह के आधार पर पुलिस महिला सुरक्षाकर्मियों ने जब सड़क किनारे फेंके गए उस संदिग्ध पैकेट को उठाकर उसकी सघन जांच की, तो उसमें से 6.73 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने ड्रग्स को जब्त कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया था।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल सबूतों और चश्मदीद गवाहों के बयानों को बारीकी से परखा। इसके बाद माननीय न्यायाधीश ने महिला को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत आधिकारिक रूप से ड्रग्स तस्करी का दोषी पाया।

पहले ही काट चुकी है सजा से अधिक समय, अब मिलेगी रिहाई

अदालत ने अपने अंतिम आदेश में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु को पूरी तरह से स्पष्ट किया है। दोषी महिला 6 मई 2021 से 3 मार्च 2023 तक कुल 667 दिनों तक न्यायिक हिरासत के तहत जेल में रह चुकी है।

चूंकि यह पुरानी अवधि कोर्ट द्वारा सुनाई गई एक वर्ष की सजा से काफी अधिक है, इसलिए धारा 468 बीएनएसएस के तहत इस समय का पूरा समायोजन कर दिया गया है। ऐसे में कानूनी नियमों के अनुसार दोषी महिला को अब आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं होगी।

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