New Delhi News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक दबाव के बावजूद भारत अपने स्टैंड पर पूरी तरह अडिग रहा। वाशिंगटन के दबाव के आगे झुकने से इनकार करने के बाद अमेरिकी सेना की एक कमांड का नाम बदला गया। ट्रंप प्रशासन ने ‘इंडो-पैसिफिक’ का नाम बदलकर ‘यूएस-पैसिफिक’ कर दिया, लेकिन जापान ने भारत का खुलकर समर्थन किया है।
भारत और जापान ने अमेरिकी नजरिये को पूरी तरह नकारा
भारत दौरे पर आईं जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नई दिल्ली में बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों नेताओं ने सोलहवें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय हितों और वैश्विक मुद्दों पर सीधी बातचीत की। इस बैठक में दोनों देशों ने मुक्त और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटाने पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत देने की कोशिश की थी कि भारत यदि उसके हिसाब से नहीं चलेगा तो उसे एशिया में खास महत्व नहीं मिलेगा। जापान ने इस अमेरिकी नजरिये को सिरे से खारिज कर दिया।
द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में इंडो पैसिफिक विजन पर सहमति
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं की ओर से एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी किया गया। इस आधिकारिक बयान में दोनों देशों ने ‘इंडो-पैसिफिक’ शब्द का विशेष रूप से उल्लेख किया है। इसके साथ ही दोनों मित्र देशों ने क्वाड समूह के तहत अपने रणनीतिक और सैन्य सहयोग को और ज्यादा गहरा करने पर सहमति व्यक्त की है।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और पीएम मोदी ने जापान के अपडेटेड ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ विजन को भारत की समुद्री पहल महासागर के साथ जोड़ने का फैसला किया। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया ब्रीफिंग में पुष्टि की कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच इस रणनीतिक क्षेत्र पर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई।
शिंजो आबे की मूल अवधारणा को आगे बढ़ाएंगे दोनों देश
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं ने पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के मूल दर्शन पर अपनी बातचीत को आधारित रखा। प्रधानमंत्री ताकाइची ने साल दो हजार सात में आबे की भारत यात्रा और भारतीय संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण को याद किया, जिसने इस क्षेत्र की मजबूत नींव रखी थी।
शिखर सम्मेलन में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से संयुक्त रूप से निपटने के तरीकों पर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समानता उभरी। जापानी पीएम ने अपने अपडेटेड सुरक्षा ढांचे के बारे में बताया, जिसका मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक देशों की स्वायत्तता बढ़ाना और बाहरी देशों के आर्थिक एवं सुरक्षा दबावों के खिलाफ एक मजबूत लचीलापन विकसित करना है।
क्वाड के तहत चीन की सैन्य चुनौतियों का मुकाबला
यह नया विकसित ढांचा सीधे तौर पर भारत के महासागर विजन से जुड़ा हुआ है। इससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक और आर्थिक सहयोग के दायरे का बड़ा विस्तार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के इस नए दृष्टिकोण का स्वागत करते हुए आपसी रणनीतिक प्रगति को और तेज करने का ठोस इरादा जताया है।
दोनों देशों ने तय किया है कि क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग यानी क्वाड के तहत सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत नवस्थापित इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए काम तेज होगा। विदेश सचिव ने घोषणा की कि इस सैन्य नेटवर्क का अगला टेबलटॉप अभ्यास अब जापान में आयोजित किया जाएगा।
शिखर सम्मेलन के समापन पर दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि दोनों देश कानून के शासन पर आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं। इस विशेष सामरिक साझेदारी के जरिए दुनिया को संदेश दिया गया है कि अमेरिका में प्रशासनिक बदलावों के बावजूद यह क्षेत्र उनके साझा भविष्य का मुख्य केंद्र रहेगा।

