New Delhi News: पूर्वी कांगो में जानलेवा इबोला वायरस के एक नए और बेहद खतरनाक प्रकोप ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस महामारी की आधिकारिक घोषणा के एक महीने के भीतर ही 100 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। रविवार तक इलाके में इबोला के 550 पुष्ट मामलों की पहचान की जा चुकी है।
कांगो में पैर पसार रही इस महामारी को देखते हुए भारत सरकार समेत पूरे एशिया महाद्वीप में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित मरीजों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। इस बार संक्रमण की पहचान करने और उसकी आधिकारिक पुष्टि करने में कई हफ्तों की देरी हुई है।
बिना इलाज और टीके वाला दुर्लभ वायरस
इस बार तबाही मचा रहा यह प्रकोप बेहद दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो वायरस’ (Bundibugyo Virus) के कारण फैला है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस विशिष्ट वायरस के लिए वर्तमान में दुनिया में कोई भी स्वीकृत टीका (Vaccine) या सटीक प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। इसके चलते इस बीमारी से मृत्यु दर लगातार बढ़ती जा रही है।
जमीन पर इस जानलेवा बीमारी पर काबू पाने के प्रयासों को भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य प्रणालियों पर गहरा संदेह, स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हिंसक हमले और इलाके में जारी सशस्त्र संघर्ष के कारण मेडिकल टीमें प्रभावित लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं।
केन्या में क्वारेंटाइन सेंटर का भारी विरोध
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस वायरस का असर पड़ोसी देशों में भी दिखने लगा है। केन्या में इबोला से संक्रमित अमेरिकी नागरिकों के इलाज के लिए एक विशेष क्वारेंटाइन सेंटर बनाया जा रहा है। स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को खतरे में देख इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए और हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस उग्र प्रदर्शन को काबू में करने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह दुखद घटना मध्य केन्या में हुई है। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने फिलहाल इस मामले की पूरी जानकारी होने से साफ इनकार किया है, लेकिन घटना की उच्च स्तरीय जांच जारी है।
भारत समेत पूरे एशिया में सीमाओं पर सख्त चौकसी
इस खतरनाक वायरस के फैलने के डर से केवल भारत ही नहीं, बल्कि सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और खाड़ी देशों (यूएई और सऊदी अरब) सहित पूरे एशिया में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी अभूतपूर्व तैयारी शुरू कर दी गई है। वैश्विक हवाई कनेक्टिविटी के कारण इस जानलेवा वायरस के एशिया में प्रवेश करने का जोखिम सबसे ज्यादा है।
जोखिम को देखते हुए इन सभी देशों के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर आने वाले संदिग्ध यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग और कड़ाई से चिकित्सा जांच शुरू कर दी गई है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की विशेष निगरानी और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत आइसोलेट करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
Author: Pallavi Sharma

