Uttar Pradesh News: नौतपा के पहले ही दिन सोमवार को तपोस्थली भीषण गर्मी से बुरी तरह झुलस गई। सुबह होते ही आसमान से तेज आग बरसने लगी। दोपहर होने से पहले ही वाहनों की रफ्तार थम गई। गांव से लेकर शहर तक की सभी सड़कें पूरी तरह वीरान हो गईं।
सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं रात का न्यूनतम पारा 31 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। रात का तापमान बढ़ने से अब उमस ने भी लोगों पर भारी सितम ढाना शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
आने वाले दो दिनों में 46 पार जाएगा पारा
मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि अगले दो दिनों में पारा 46 डिग्री के पार पहुंच सकता है। तथागत की पावन तपोस्थली इन दिनों नौतपा की प्रचंड तपिश में तवे की तरह तप रही है। आसमान से बरसती आग और गर्म थपेड़ों ने जनजीवन पूरी तरह बेहाल कर दिया है।
इस खतरनाक गर्मी ने आम आदमी की पूरी दिनचर्या को बदल दिया है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सुबह जल्दी या शाम को काम कर रहे हैं। कई छोटे दुकानदार दोपहर में अपनी दुकानें बंद रख रहे हैं। घरों में लगे कूलर और पंखे भी लगातार गर्म हवा फेंक रहे हैं।
पूरब और पश्चिम से चलने वाली हवाएं आपस में टकराईं
दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच प्रमुख बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छाने से उमस ने विकराल रूप ले लिया। नौतपा के दौरान पुरवा और पछुआ हवाएं आपस में टकराती रहीं। यह खेल सुबह से लेकर दोपहर तक लगातार चलता रहा।
इसके बाद पछुआ हवा ने रफ्तार पकड़ी तो पुरवा पूरी तरह खामोश हो गई। लू के गर्म थपेड़ों और उमस से लोग दिनभर बेहाल नजर आए। केवल बेहद जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले। सफर पर निकले मुसाफिर भी रास्ते में पेड़ों की ठंडी छांव तलाशते रहे।
लापरवाही पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने दी चेतावनी
नेवादा के नंदा का पुरवा गांव के पास मुसाफिरों ने पीपल और बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर आराम किया। घनी शाखाओं की ठंडी छांव में पहुंचकर थके हुए मुसाफिरों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरके शर्मा ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने की सलाह दी है।
डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, छाछ और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। उल्टी, दस्त, तेज बुखार या अत्यधिक थकान होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह जानलेवा तपिश बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों के लिए बेहद संवेदनशील हो सकती है।
Author: Shilla Bhatia

