Meerut News: बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग के लिए बनने वाले बेसमेंट का शहर में धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल हो रहा है। रसूखदार लोग नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में कोचिंग, अस्पताल, दुकानें और अवैध फैक्ट्रियां संचालित कर रहे हैं। जिम्मेदार विभाग इन गंभीर मामलों में पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।
मेरठ विकास प्राधिकरण के अंतर्गत बेसमेंट का उपयोग उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि द्वारा तय होता है। इन सख्त नियमों के अनुसार बिना वैध नक्शा और फायर एनओसी के व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह अवैध है। आवासीय क्षेत्रों में बेसमेंट केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए ही स्वीकृत होते हैं।
बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे सैकड़ों कोचिंग सेंटर
बायलॉज के मुताबिक बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग, एसी प्लांट या स्ट्रॉन्ग रूम के लिए ही हो सकता है। इसके बावजूद शहर के बेसमेंट में कोचिंग, बैंक, ओपीडी, लैब और क्लाउड किचन धड़ल्ले से चल रहे हैं। यहां तक कि कई जगहों पर बरातघर और ब्यूटी पार्लर भी खोल दिए गए हैं।
दिल्ली की बड़ी दुर्घटना के बाद एमडीए ने दिखावे के लिए कुछ नोटिस जरूर जारी किए थे। लेकिन बाद में अधिकारियों ने आज तक किसी भी अवैध संस्थान की जांच करना मुनासिब नहीं समझा। आज भी सैकड़ों बच्चे बिना रजिस्ट्रेशन और फायर एनओसी वाले खतरनाक बेसमेंट में पढ़ने को मजबूर हैं।
ऊंचाई और इमरजेंसी एग्जिट के नियम हवा में उड़े
नियमों के अनुसार बेसमेंट की स्पष्ट ऊंचाई फर्श से छत तक न्यूनतम 2.4 मीटर से 2.75 मीटर तक होनी चाहिए। लेकिन शहर का कोई भी बेसमेंट इस पैमाने पर खरा नहीं उतरता है। इनमें न तो उचित वेंटिलेशन है और न ही आपातकालीन निकास के लिए अलग सीढ़ी है।
सस्ते किराए के लालच में लोग नियमों के विरुद्ध क्लाउड किचन और जिम चला रहे हैं। किसी भी व्यावसायिक रसोई के लिए एफएसएसएआई और फायर सेफ्टी एनओसी बेहद अनिवार्य होती है। बेसमेंट में वेंटिलेशन की भारी कमी के कारण अचानक भीषण आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
अस्पताल और खतरनाक फैक्ट्रियां चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रूल्स के तहत मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर बेसमेंट में अस्पताल या वार्ड चलाना सख्त मना है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं हमेशा केवल भूतल पर ही होनी चाहिए। इसी तरह बेसमेंट में किसी भी प्रकार की फैक्ट्री या खतरनाक औद्योगिक इकाई लगाना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
प्रशासन और फायर विभाग की इस लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दिल्ली की घटना से सबक न लेना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समय रहते इन अवैध बेसमेंट पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना जनता की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
Author: Adv Anuradha Rajput

