बेटे के पहले जन्मदिन पर आने का वादा था, पर तिरंगे में लिपटकर आया पिता! बलिदानी विकास की विदाई में रो पड़ा उत्तराखंड

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ के वीर सपूत लांस नायक विकास कुमार का पार्थिव शरीर पांच दिनों के लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को उनके पैतृक गांव गणकोट (सुकौली) पहुंचा। सिक्किम की बर्फीली चोटियों पर हिमस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए विकास की अंतिम विदाई में जनसैलाब उमड़ पड़ा। नम आंखों से हजारों लोगों ने ‘विकास कुमार अमर रहे’ के नारों के साथ उन्हें विदा किया। 27 वर्षीय विकास भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। स्थानीय रामेश्वर घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़े भाई नीरज कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी।

“इन्हें अस्पताल ले चलो…” पत्नी की बेबसी देख कांप गई रूह

शहीद का शव जैसे ही घर पहुंचा, कोहराम मच गया। तिरंगे में लिपटे पति को देखकर पत्नी प्रीति बेसुध हो गईं। वे बार-बार ताबूत से लिपटकर यही कह रही थीं कि “इन्हें अस्पताल लेकर चलो, ये ठीक हो जाएंगे।” इस मंजर को देखकर वहां मौजूद जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई और अन्य अधिकारियों की आंखें भी भर आईं। शहीद की मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरा गांव पांच दिनों से इस वीर के दर्शन के लिए पलकें बिछाए बैठा था, लेकिन तिरंगे में लिपटी देह ने सबको झकझोर दिया।

बेटे के पहले जन्मदिन पर आना था घर

विकास की शादी साल 2023 में हुई थी। उनका एक 10 माह का बेटा है, जिसका नाम पृथ्विक है। शहीद विकास पिछली बार दिसंबर में छुट्टी पर आए थे। उन्होंने वादा किया था कि वे जून में बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आएंगे। किसे पता था कि जून से पहले ही वे तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे। मासूम पृथ्विक को तो यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। भाई नीरज ने मांग की है कि गांव के प्रवेश द्वार और स्कूल का नाम विकास के नाम पर रखा जाए ताकि उनकी शहादत अमर रहे।

सैन्य सम्मान के साथ रामेश्वर घाट पर अंतिम विदाई

घर पर अंतिम दर्शन के बाद शहीद की शव यात्रा रामेश्वर घाट के लिए रवाना हुई। 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा की। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा’ के नारों से पूरी घाटी गूंज उठी। सेना के विशेष वाहन के पीछे वाहनों का लंबा काफिला चल रहा था। घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।

2017 में सेना में भर्ती होकर पूरा किया था सपना

विकास कुमार का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। साल 2017 में वे सेना में भर्ती हुए और अपनी मेहनत से लांस नायक के पद तक पहुंचे। 29 मार्च को सीमा पर गश्त के दौरान हुए हादसे ने इस जांबाज को हमसे छीन लिया। जिलाधिकारी ने शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विकास का सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। शासन और प्रशासन इस दुख की घड़ी में शहीद के परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है।

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