Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दान पात्र योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्रियां तेजी से हो रही हैं। इस वर्ष शुरुआती पांच महीनों में ही लोगों ने 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति अपनों को दान कर दी। इस बेहतरीन सरकारी योजना से अब तक 3142 लोगों को सीधा लाभ मिला है।
वहीं वर्ष 2025 में कुल 17251 संपत्तियां दान की गई थीं। सरकार ने जब से यह योजना लागू की है, तब से पिछले चार वर्षों में कुल 39 हजार लोग लाभान्वित हो चुके हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में संपत्ति दान करने के मामले में संगम नगरी प्रयागराज सबसे शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
महज पांच हजार में ट्रांसफर हो रही है बड़ी से बड़ी जायदाद
इस योजना के तहत मात्र 5000 रुपये की स्टांप ड्यूटी देकर आप बड़ी से बड़ी प्रॉपर्टी अपनों के नाम कर सकते हैं। सरकार यह खास लाभ केवल रक्त संबंधियों के बीच प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने पर दे रही है। तीर्थराज में पिछले डेढ़ साल में लगभग 619 करोड़ रुपये की संपत्ति दान की गई है।
आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी, फरवरी और मार्च में 2109 संपत्तियां दान की गईं। इसके बाद अप्रैल और मई के महीने में 1033 संपत्तियों को दान किया गया। इस साल सरकार को निबंधन शुल्क और स्टांप शुल्क के रूप में करीब 12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
पिछले वर्ष सरकार को स्टांप व निबंधन शुल्क के रूप में लगभग 65 करोड़ रुपये मिले थे। प्रयागराज की सदर तहसील में सबसे ज्यादा लोगों ने इसका फायदा उठाया। इसके बाद फूलपुर, सोरांव और करछना तहसील के लोगों ने दान पात्र योजना के तहत अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाई।
पारिवारिक विवादों को हमेशा के लिए खत्म करेगी यह योजना
दान पात्र के माध्यम से चल या अचल संपत्ति मात्र पांच हजार रुपये में स्थानांतरित होती है। इसमें केवल एक प्रतिशत निबंधन शुल्क अलग से लगता है। तहसीलों के उपनिबंधक कार्यालय में यह विलेख होते हैं। छूट पाने वालों में माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा-बहू, भाई-बहन और उनके बच्चे शामिल हैं।
एआइजी स्टांप राकेश चंद्रा ने बताया कि दान पात्र एक पूरी तरह वैध कानूनी दस्तावेज है। इससे संपत्ति का मालिक बिना किसी पैसे के रक्त संबंधियों को जायदाद स्वेच्छा से ट्रांसफर करता है। इसके प्रमुख लाभों में कानूनी सुरक्षा और टैक्स अर्थात स्टांप ड्यूटी में भारी छूट मिलना शामिल है।
सरकार ने संपत्ति से संबंधित पारिवारिक विवादों और राजस्व मुकदमों पर अंकुश लगाने के लिए इसे शुरू किया है। अब पिता अपने जीवनकाल में ही बच्चों को संपत्ति दे सकता है। इससे पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच होने वाले तमाम तरह के मनमुटाव और अदालती झगड़े खत्म हो जाएंगे।
पहले लगता था दस प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का भारी भरकम खर्च
इस नई योजना के आने से पहले पैतृक संपत्ति ट्रांसफर कराने पर कुल कीमत का 10 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था। उदाहरण के लिए, यदि किसी को 50 लाख की संपत्ति ट्रांसफर करानी होती थी, तो उसे पांच लाख रुपये चुकाने पड़ते थे। अब यही काम महज पांच हजार रुपये में हो रहा है।
हालांकि, संपत्ति विभाजन के मामले में वर्ष 2025 व 2026 में अब तक मात्र सात विभाजन ही दर्ज हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अंग्रेजी और हिंदी शासनादेश में कुछ तकनीकी विसंगतियां मौजूद हैं। इन विसंगतियों के चलते ही लोग संपत्ति विभाजन का लाभ उठाने से अभी थोड़ा बच रहे हैं।
Author: Ajay Mishra


