Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में गर्मी की छुट्टियां बच्चों के लिए भारी मुसीबत लेकर आई हैं। शहर में आवारा कुत्तों, आक्रामक बंदरों और छुट्टा सांडों के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि इस बार समर वेकेशन पूरी तरह डॉग बाइट सीजन में बदल गया है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में जनवरी से जून के बीच एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों का तांता लगा हुआ है। छह महीनों में औसतन 25 हजार से अधिक पीड़ित इलाज के लिए पहुंचे हैं। जनवरी की तुलना में अकेले मई महीने में मरीजों की संख्या में 55 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल आया है।
चाइल्ड एक्सपोजर विंडो के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे बच्चे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छुट्टियों में बच्चों का आउटडोर एक्सपोजर बढ़ने से यह गंभीर समस्या खड़ी हुई है। इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘चाइल्ड एक्सपोजर विंडो’ कहा जा रहा है। स्कूल बंद होने के कारण इस दौरान बच्चों और आवारा जानवरों का आमना-सामना सामान्य दिनों से कई गुना अधिक हो रहा है।
बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं और अनजाने में जानवरों के क्षेत्र में चले जाते हैं। वे अक्सर कुत्तों के गुर्राने जैसे खतरे के शुरुआती संकेतों को बिल्कुल नहीं पहचान पाते हैं। इस ‘प्लेग्राउंड टू पेशन्ट पैटर्न’ की वजह से ही कुल पीड़ितों में अकेले बच्चों की संख्या 28 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
बढ़ते तापमान से जानवरों में दिख रहा हॉट वेदर एग्रेसन पैटर्न
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बढ़ता तापमान इंसानों के साथ-साथ पशुओं के दिमागी संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक हीट स्ट्रेस, पानी की भारी कमी और भोजन के लिए आपसी संघर्ष के कारण कुत्तों और बंदरों का व्यवहार इन दिनों बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा, संवेदनशील और आक्रामक हो रहा है।
एनिमल बिहेवियर एक्सपर्ट्स ने इस खतरनाक व्यवहार को ‘हॉट वेदर एग्रेसन पैटर्न’ का नाम दिया है। ऐसे भीषण माहौल में जब भी कोई इंसान या बच्चा अचानक सोए हुए जानवर के करीब जाता है या उसके आराम की जगह में दखल देता है, तो वह हिंसक होकर हमला कर देता है।
शहरी सोसायटियों में बढ़ता ह्यूमन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट जोन का खतरा
मेरठ के गंगानगर, शताब्दी नगर, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा, मवाना रोड और ब्रह्मपुरी जैसे रिहाइशी इलाके अब ‘ह्यूनम-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट जोन’ बन गए हैं। छतों पर बंदरों का कब्जा है तो गलियों में आवारा कुत्तों के झुंड बैठे रहते हैं। वहीं दिल्ली रोड और परतापुर बेल्ट में छुट्टा सांड लगातार भयानक हादसों का कारण बन रहे हैं।
अस्पताल के डॉक्टर अंकित के मुताबिक पेरेंट्स को समर वेकेशन को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से एक हाई-रिस्क पीरियड के रूप में देखना चाहिए। एसीएमओ डॉ. अंकुर त्यागी ने चेतावनी दी है कि डॉग बाइट के मामलों में इलाज में देरी बिल्कुल न करें और घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 15 मिनट धोएं।
Author: Ajay Mishra


