मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ सीपीआर का खास प्रशिक्षण, जानें कैसे एक छोटी सी तकनीक बचा सकती है आपके अपनों की जान

Uttar Pradesh News: मेडिकल कॉलेज के एनेस्थेसियोलॉजी विभाग में शुक्रवार को दो दिवसीय विशेष चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शानदार आगाज हुआ। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रमाणित इस सत्र में विशेषज्ञों ने सीपीआर, बीएलएस और एसीएलएस तकनीकों की ट्रेनिंग दी। इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में लोगों की जान बचाना और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना है।

अस्पताल पहुंचने से पहले ऐसे बचाएं मरीज की जान

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि और कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बीएलएस एक बेहद बुनियादी चिकित्सा सहायता है। यह तकनीक अस्पताल पहुंचने से पहले या तुरंत चिकित्सा सुविधा न मिलने की स्थिति में जीवन रक्षक साबित होती है।

दिल का दौरा पड़ने पर अपनाएं यह सही तरीका

एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश मणिक ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने पर सही सीपीआर से जान बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मरीज की छाती खत्म होने और पेट शुरू होने वाले हिस्से पर हथेली रखकर दबाएं। एक मिनट में 100 से 120 बार छाती को दबाना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

नोएडा के नामचीन प्रशिक्षकों ने दी विशेष ट्रेनिंग

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नोएडा से आए विशेष प्रशिक्षक शिजो जॉर्ज, डॉ. संतोष, मनु और अर्जुन ने डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस दौरान एनसीआर मेडिकल कॉलेज के 4 वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भी ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। इस तरह के आयोजनों से गंभीर मरीजों के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

समारोह में डॉ. एसके पालीवाल, डॉ. विपिन धामा, डॉ. नेहा, डॉ. प्रेम प्रकाश मिश्रा और डॉ. प्रमोद समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे। प्राचार्य ने एनेस्थीसिया टीम की जमकर सराहना की। यह अनूठी ट्रेनिंग डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह कुशल और आत्मनिर्भर बनाएगी।

Author: Ajay Mishra

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