Delhi News: केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा समाप्त हो गई है। कुल संपत्तियों में से करीब एक तिहाई जमीनों के लिए आवेदन ही नहीं किया गया। इस हैरान करने वाले आंकड़े के सामने आने के बाद अब देश भर में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लाखों एकड़ की संपत्तियों का नहीं हुआ पंजीकरण
देश में वक्फ की करीब 8 लाख 72 हजार संपत्तियां हैं। इनमें से सिर्फ 5 लाख 17 हजार संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन के लिए ही आवेदन आए। लगभग ढाई से साढ़े तीन लाख संपत्तियों के प्रबंधकों ने इस सरकारी पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
पंजीकरण की आखिरी तारीख तक करीब 2 लाख 16 हजार संपत्तियों का वेरिफिकेशन हो चुका है। इसके अलावा 2 लाख 13 हजार से अधिक संपत्तियों की जांच अभी बाकी है। वहीं, लगभग 80 हजार से ज्यादा संपत्तियों का वेरिफिकेशन प्रोसेस अलग-अलग स्तरों पर तेजी से चल रहा है।
चार बड़े महानगरों से भी बड़ा भू-भाग छूटा
एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 39 लाख एकड़ जमीन वक्फ के अधीन है। इस हिसाब से करीब 13 लाख एकड़ में फैली कीमती संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ। यह भू-भाग दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों के कुल क्षेत्रफल से भी कहीं ज्यादा बड़ा है।
बाजार दर के अनुसार बिना आवेदन वाली इन जमीनों की कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई है। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सरकार ने छह महीने का पर्याप्त समय दिया था। इसके बावजूद इतनी बड़ी तादाद में वक्फ प्रबंधकों ने आवेदन करने से दूरी बनाकर रखी।
दस्तावेजों की कमी या कानूनी कार्रवाई का डर?
इतनी बड़ी जमीनों का रजिस्ट्रेशन न होने पर अब देश के रक्षा और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्रबंधकों के पास पुख्ता कानूनी दस्तावेज नहीं थे? क्या यह संपत्तियां विवादित थीं या इन पर गैर कानूनी तरीके से अवैध कब्जा किया गया था?
जानकारों का मानना है कि कानूनी कार्रवाई के डर से ही इन संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। कुछ लोग इसके पीछे लापरवाही या तकनीकी दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं। लेकिन जमीनों के मामलों में कोई भी इतनी बड़ी कोताही आसानी से नहीं बरतता है।
जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश सबसे आगे रहे
इस पूरे मामले में देश के कुछ राज्यों का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा है। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने अपनी लगभग 98 प्रतिशत से अधिक संपत्तियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा करा लिया। वहीं आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी यह आंकड़ा 90 फीसदी के पार पहुंच गया।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं लेकिन वहां काम की रफ्तार धीमी रही। कुछ समय पहले वक्फ बिल के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे थे। कोलकाता में बड़ा आंदोलन हुआ था। अब लोग पूछ रहे हैं कि आंदोलन करने वाले जिम्मेदारी के वक्त पीछे क्यों हट गए।
Author: Harikarishan Sharma


