Maharashtra News: मराठा आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में आज से एक बार फिर बड़ा आमरण अनशन शुरू होने जा रहा है। इस पूरे आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार और फायरब्रांड नेता मनोज जरांगे पाटिल के आमरण अनशन का आज पहला दिन है।
मनोज जरांगे पाटिल आज सुबह ठीक 10 बजे से जालना के अंतरवाली सराटी गांव में कड़कड़ाती और चिलचिलाती धूप के बीच भूख हड़ताल पर बैठेंगे। बीते गुरुवार को सूबे के कद्दावर मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड के नेतृत्व वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे पाटिल से लंबी मुलाकात की थी।
सरकार के साथ हुई इस मैराथन बैठक के बाद भी मनोज जरांगे पाटिल टस से मस नहीं हुए और अपने अनशन के फैसले पर पूरी तरह अड़े रहे। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, आज सरकार मनोज जरांगे पाटिल की कुछ प्रमुख मांगों को लिखित रूप में स्वीकार करने का मन बना चुकी है।
सरकार सौंप सकती है मांगों का नया ड्राफ्ट
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए सरकार की ओर से आज मनोज जरांगे पाटिल को एक विशेष ड्राफ्ट सौंपा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल आज एक बार फिर अंतरवाली सराटी जाकर पाटिल से मुलाकात कर सकते हैं और उन्हें अनशन खत्म करने के लिए मनाएंगे।
फिलहाल, मराठा आरक्षण आंदोलन के इस नए मोड़ को लेकर पूरे महाराष्ट्र राज्य की सियासी नजरें अंतरवाली सराटी पर टिकी हुई हैं। भूख हड़ताल पर जाने की बड़ी घोषणा करते हुए खुद जरांगे ने साफ कहा कि अगर इस चिलचिलाती गर्मी में विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार की होगी।
जानिए आखिर क्यों दोबारा हो रहा है यह तीखा विरोध?
मनोज जरांगे पाटिल का यह ताजा विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से आरक्षण सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में सामने आ रही गंभीर गड़बड़ियों को लेकर है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार की तरफ से फिर से जारी किए जा रहे सर्टिफिकेट में कई बड़ी कमियां हैं, जिससे समाज को नुकसान हो रहा है।
इसके साथ ही पुराने और लंबित पड़े जाति प्रमाण पत्रों को जारी करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। आंदोलन का एक और बड़ा कारण कुणबी रिकॉर्ड का सटीक पता लगाने के लिए बनाई गई संदीप शिंदे समिति के कार्यकाल को सरकार द्वारा एक और साल का विस्तार देना भी है, जिससे मराठा समाज नाराज है।
कानूनी अड़चनों के कारण लग रहा है समय: विखे पाटिल
मराठा आरक्षण को जमीनी स्तर पर लागू करने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर खुलकर रोशनी डालते हुए महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री विखे पाटिल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आरक्षण देने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय कर दी है और इस पर लगातार प्रशासनिक अपडेट भी लिए जा रहे हैं।
मंत्री विखे पाटिल ने आगे स्पष्ट किया कि सर्टिफिकेट के कानूनी सत्यापन जैसी कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करने में प्रशासनिक समय लग रहा है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर काम नहीं कर रही है, सरकार मराठा समाज के साथ खड़ी है।
Author: Sachin Kulkarni

