Ladakh News: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने क्षेत्र के दैनिक वेतनभोगियों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। एलजी ने बरसों से लंबित पड़े वेतन सुधार प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने न्यूनतम मजदूरी कानून के तहत तत्काल प्रभाव से वेतन देने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासन के इस ऐतिहासिक फैसले से लद्दाख के उन हजारों कर्मचारियों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी, जो पिछले कई वर्षों से महज 300 से 500 रुपये मासिक के बेहद कम वेतन पर काम करने को मजबूर थे। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों के सफाईकर्मी, माली और क्लीनर जैसे स्थानीय और प्रवासी श्रमिक शामिल हैं।
कुशल और अकुशल श्रेणियों में होगा श्रमिकों का बंटवारा
नई वेतन व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए कर्मचारियों को ‘कुशल’ (Skilled) और ‘अकुशल’ (Unskilled) श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। इसके तहत कुशल श्रमिकों को 575 रुपये प्रतिदिन और अकुशल श्रमिकों को 450 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। यह पारिश्रमिक उनके काम के प्रकार और ड्यूटी घंटों के आधार पर तय होगा।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि लद्दाख के दूरदराज और बेहद कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में इन दैनिक वेतनभोगियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर श्रमिक को उसके श्रम का सम्मानजनक और उचित पारिश्रमिक मिलना ही चाहिए।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से सीधे बैंक खाते में आएगी मजदूरी
लद्दाख प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों को एक सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत 17 मार्च 2015 के बाद नियुक्त हुए सभी कर्मचारियों के कार्य विवरण, काम के घंटे और बैंक खातों का गहन सत्यापन कर अगले 20 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट मुख्यालय में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही सभी पात्र कर्मचारियों का वेतन सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कदम केवल वेतन के तर्कसंगतीकरण के लिए है, इसे कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण के रूप में बिल्कुल न देखा जाए।
Author: Rigzin Namgyal

