West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ममता बनर्जी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके गियासुद्दीन मोल्ला ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी और एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ स्थानीय थाने में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।
दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार तृणमूल के टिकट पर विधायक रहे गियासुद्दीन मोल्ला ने रविवार को इस शिकायत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय तक भारी डर के कारण पूरी तरह चुप बैठे थे। लेकिन अब राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था बदल चुकी है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार पर जताया भरोसा
पूर्व मंत्री मोल्ला ने साफ कहा कि अब उन्हें राज्य की नई प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार पर पूरा भरोसा है। इसी भरोसे के कारण उन्होंने इतने समय बाद न्याय के लिए आगे आने और दबंग नेताओं के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराने का बड़ा निर्णय लिया है।
मोल्ला ने आरोप लगाया कि तत्कालीन उपमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) मिथुन कुमार दे क्षेत्र के कुछ सक्रिय तृणमूल कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार अनुचित दंडात्मक कार्रवाई करते थे। पुलिस अधिकारी ने एक पार्टी कार्यकर्ता की पुलिस थाने के अंदर ले जाकर बुरी तरह पिटाई की थी और उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया था।
अभिषेक बनर्जी के इशारे पर काम कर रही थी पुलिस
पूर्व मंत्री ने बताया कि जब उन्होंने थाने के अंदर कार्यकर्ता पर हुए इस अत्याचार का कड़ा विरोध किया, तो पुलिस अधिकारी मिथुन कुमार दे ने उनके साथ भी बेहद अभद्र दुर्व्यवहार किया। पुलिस अधिकारी लाठी लेकर उन पर हमला करने के लिए दौड़े थे, जिससे उनकी सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया था।
उन्होंने इस पूरे हिंसक मामले की जानकारी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दोनों को दी थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। मोल्ला का सीधा आरोप है कि अभिषेक बनर्जी को इन सभी घटनाओं की पूरी जानकारी थी और पुलिस अधिकारी कथित तौर पर सीधे उनके निर्देश पर ही काम कर रहा था।
Author: Sourav Banerjee

