Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टीजीटी शिक्षकों को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। अदालत ने टीजीटी शिक्षकों को अंतरिम राहत देने से साफ मना कर दिया है। ये शिक्षक सीबीएसई सब-कैडर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना चाहते थे। शिक्षक खुद को डीम्ड (मानित) पीजीटी मानकर इस भर्ती परीक्षा में हिस्सा लेना चाहते थे। लेकिन अदालत ने उनकी यह अहम मांग पूरी तरह ठुकरा दी है। अब इन शिक्षकों को इस नई भर्ती में कोई मौका नहीं मिलेगा।
न्यायिक औचित्य के खिलाफ है यह मांग
न्यायाधीश अजय गोयल की अदालत ने इस मामले पर काफी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि अंतरिम राहत देने के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं हो रही हैं। प्रथम दृष्टया मामला और सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। अदालत के मुताबिक ऐसी राहत देना पूरी तरह से न्यायिक औचित्य के खिलाफ होगा। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से उन लोगों को मौका मिल जाएगा जिनका उस पद के लिए कोई कानूनी वजूद ही नहीं है।
शिक्षकों ने की थी वरिष्ठता सूची लागू करने की मांग
गुरबख्श सिंह और अन्य कई शिक्षकों ने अदालत में यह याचिका दायर की थी। टीजीटी के रूप में काम कर रहे इन शिक्षकों ने संशोधित वरिष्ठता सूची लागू करने की मांग रखी थी। वे चाहते थे कि उन्हें पीजीटी के पद पर पदोन्नत माना जाए। इससे वे नए सीबीएसई सब-कैडर की भर्ती परीक्षा में भाग ले पाते। यह भर्ती सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए ही की जा रही है। शिक्षकों ने आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने की भी गुहार लगाई थी।
असली पीजीटी शिक्षकों के साथ होगा बड़ा अन्याय
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता अनूप रतन ने अदालत में मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले से ही खंडपीठ के पास लंबित है। याचिकाकर्ता अभी भी टीजीटी के पद पर ही काम कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें पीजीटी मानकर भर्ती में शामिल करना कानूनी रूप से पूरी तरह गलत है। अदालत ने सरकार की इस अहम दलील से पूरी तरह सहमति जताई। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से असली और वर्तमान पीजीटी शिक्षकों के साथ बड़ा अन्याय होगा। इस मामले की मुख्य याचिका पर अब 28 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।


