शिमला निगम सदन में सैहब कर्मचारियों का जोरदार हंगामा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बाहर खदेड़ा

Himachal Pradesh News: शिमला नगर निगम की बैठक शुक्रवार को सैहब कर्मचारियों के मुद्दे पर भारी हंगामे में बदल गई। एस्मा के बाद टर्मिनेट किए गए 41 कर्मचारियों की बहाली न होने से नाराज सीटू कार्यकर्ता बचत भवन में चल रहे निगम सदन के भीतर घुस गए। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला।

जानकारी के मुताबिक सीटू के बैनर तले सैहब कर्मचारी सुबह से बचत भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। वे निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच मेयर सुरेंद्र चौहान और पार्षद बैठक के लिए पहुंचे। इसके बाद प्रदर्शनकारी अचानक उग्र हो गए और सुरक्षा घेरा तोड़कर सदन के अंदर पहुंच गए।

प्रदर्शनकारियों के सदन में घुसते ही बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही समय पर शुरू नहीं हो सकी। कई पार्षद भी अचानक बने हालात से असहज दिखे। इसके बाद मेयर ने व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए।

मेयर ने पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए

सदन के भीतर नारेबाजी जारी रहने पर मेयर सुरेंद्र चौहान ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तुरंत बाहर निकालने के आदेश दिए। मौके पर मौजूद अतिरिक्त पुलिस बल ने सीटू कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को धक्का देकर सदन से बाहर किया। इसके बाद भी प्रदर्शनकारी बचत भवन के बाहर डटे रहे।

मेयर सुरेंद्र चौहान ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि निगम सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। मेयर ने साफ कहा कि सदन के भीतर इस तरह की गुंडागर्दी और दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने पुलिस को कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

मेयर ने कहा कि नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस लेने की एक तय कानूनी प्रक्रिया है। निगम प्रशासन उसी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। उन्होंने सीटू नेताओं से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, दबाव बनाकर किसी प्रशासनिक फैसले को पलटा नहीं जा सकता।

एस्मा के बाद बढ़ा सैहब कर्मचारियों का विवाद

यह पूरा विवाद सैहब कर्मचारियों की हड़ताल के बाद शुरू हुआ था। शहर में कूड़ा उठाने की व्यवस्था प्रभावित होने पर प्रशासन ने एस्मा लागू किया था। इसके बावजूद हड़ताल जारी रहने पर निगम प्रशासन ने 41 कर्मचारियों को टर्मिनेट कर दिया था। यूनियन अब इन्हीं कर्मचारियों की बहाली की मांग कर रही है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सैहब कर्मचारी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी की बहाली सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। हड़ताल के दौरान शिमला में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी प्रभावित हुआ था। निगम ने शहर के 34 वार्डों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वाहन और अस्थायी कर्मचारी लगाए थे।

शुक्रवार की घटना के बाद निगम प्रशासन और सीटू के बीच टकराव और बढ़ गया है। कर्मचारी बहाली की मांग पर अड़े हैं, जबकि निगम प्रशासन कानूनी प्रक्रिया की बात कर रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद भी बचत भवन के बाहर नारेबाजी जारी रही और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

Author: Sunita Gupta

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