पहली शादी छिपाकर रचाया दूसरा ब्याह, अब ट्रांसपोर्टर पति को हर महीने चुकाने होंगे 25,000 रुपये

Himachal News: मंडी की पारिवारिक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करने वाले पति को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान न्यायाधीश ने पत्नी के साथ क्रूरता और धोखाधड़ी के आरोपों को सही ठहराते हुए पति को 25,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 144 के तहत सुनाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धोखे में रखकर की गई शादी में पति अपनी वित्तीय जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

करोड़ों की संपत्ति और 60 बसों का मालिक है पति

याचिकाकर्ता काजल सकलानी के अनुसार, उनका विवाह नवंबर 2023 में बद्दी निवासी संजीव कुमार के साथ हुआ था। काजल ने आरोप लगाया कि संजीव ने अपनी पहली शादी की बात छिपाकर उन्हें अंधेरे में रखा। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वालों ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। नवंबर 2024 में मारपीट कर उन्हें घर से निकाल दिया गया। काजल ने बताया कि उनके पति एक बड़े ट्रांसपोर्टर हैं और उनके पास 60 बसें और करोड़ों की संपत्ति है।

अदालत ने की एकतरफा कार्यवाही

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संजीव कुमार अदालत में हाजिर नहीं हुआ, जिसके बाद न्यायाधीश ने सख्त रुख अपनाया। संजीव के पेश न होने पर अदालत ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही (Ex-Parte) अमल में लाई। न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि संजीव ने अपनी आय और संपत्ति का हलफनामा पेश नहीं किया, इसलिए यह माना जाएगा कि उसकी आर्थिक स्थिति बेहद सुदृढ़ है। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उसकी अनुमानित मासिक आय 50,000 से 75,000 रुपये के बीच आंकी और भत्ते का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के ‘बादशाह बनाम उर्मिला’ मामले का हवाला

अदालत ने अपने ऐतिहासिक आदेश में उच्चतम न्यायालय के ‘बादशाह बनाम उर्मिला’ केस का विशेष उल्लेख किया। न्यायाधीश ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी को गोपनीय रखकर दूसरी महिला को जाल में फंसाता है, तो वह कानूनन गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य है। यह कानून का सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का तरीका है। अदालत ने काजल की याचिका को सही मानते हुए संजीव को आदेश दिया कि वह याचिका दायर करने की तिथि से हर माह यह राशि भुगतान करे।

पीड़िता को मिला कानूनी संरक्षण

वर्तमान में काजल अपने मायके बल्ह तहसील के गांव कोहल में रह रही हैं। उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं होने के कारण यह अदालती आदेश उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि नए कानून बीएनएसएस के तहत यह आदेश महिलाओं के अधिकारों को और मजबूती प्रदान करेगा। अदालत ने सामाजिक स्थिति और पति की वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही 25,000 रुपये की सम्मानजनक राशि निर्धारित की है।

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