मिल्कफेड प्लांट के बाहर अचानक क्यों छोड़ दीं दूध की कैन? पशुपालकों के इस कदम से मची भारी खलबली!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में पशुपालकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दूध की खरीद और भुगतान को लेकर चल रहे विवाद के कारण किसानों ने उग्र रूप धारण कर लिया है। सैकड़ों की तादाद में पहुंचे किसानों ने मिल्कफेड प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मंडी के चक्कर स्थित मिल्कफेड प्लांट के बाहर भारी संख्या में पशुपालक एकत्रित हुए। इस जोरदार प्रदर्शन में मंडी, कुल्लू, मनाली, आनी, करसोग और बिलासपुर के किसान शामिल हुए। उग्र प्रदर्शन के बाद किसानों ने विरोध जताते हुए प्लांट के मुख्य गेट के बाहर दूध से भरी कैन छोड़ दीं।

किसानों की इन तीन मुख्य मांगों पर अड़ा आंदोलन

मंडी मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष अनिल जम्वाल ने अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुरुषों की मांग है कि दूध खरीद की 20 लीटर की सीमा तुरंत हटाई जाए। इसके साथ ही हर महीने की 10 तारीख से पहले दूध का पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

पशुपालकों का कहना है कि महीने में चार दिन दूध न खरीदने का फैसला बिल्कुल गलत है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा।

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ने प्रदर्शनकारियों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। चक्कर मिल्क प्लांट के प्रभारी विश्वकांत ने बताया कि प्लांट की क्षमता 50 हजार लीटर है, जबकि रोजाना एक लाख लीटर दूध आ रहा है।

Author: Sunita Gupta

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