Meerut News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का देश में बड़ा असर दिख रहा है। हैदराबाद की रैली में की गई इस भावुक अपील के बाद लोगों ने कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का रिकॉर्ड इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती तादाद भी इसका सीधा प्रमाण है।
इस बदलाव से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में ईंधन की मांग में भारी गिरावट आई है। पेट्रोलियम एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार शहर में प्रतिदिन औसतन 67 से 70 हजार लीटर पेट्रोल कम बिक रहा है। बीते दस दिनों में कुल 7.03 लाख लीटर ईंधन की खपत कम हुई है।
पेट्रोलियम एसोसिएशन के चौंकाने वाले ताजा आंकड़े
आम दिनों में मेरठ जनपद में हर दिन करीब 10 से 12 लाख लीटर डीजल बिकता था। इसी तरह करीब 8 से 10 लाख लीटर पेट्रोल की दैनिक खपत होती थी। हालांकि 11 मई के बाद से इस बड़े आंकड़े में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जो बेहद हैरान करने वाली है।
मेरठ आरटीओ में अब तक 15 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 70 से 80 फीसदी संख्या दोपहिया वाहनों की है जो करीब 12 लाख के आसपास है। इसके अलावा दो से तीन लाख निजी कारें और करीब एक लाख भारी कमर्शियल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
हवा साफ होने से सेहत को मिलेंगे बड़े फायदे
वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार होने से नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होगा। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक कणों की कमी से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। इससे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, खांसी और गले की खराश जैसी गंभीर श्वसन समस्याओं से तुरंत राहत मिलने लगेगी।
प्रदूषित कण खून में पहुंचकर नसों को ब्लॉक कर देते हैं जिससे दिल का दौरा पड़ता है। शुद्ध हवा मिलने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है। यह बच्चों के फेफड़ों के सही विकास और युवाओं के मानसिक तनाव को कम करने में भी मददगार है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और विशेषज्ञों का बड़ा दावा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार एमआईईटी सेंटर ने शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक 11 मई को एक्यूआई 231 था जो 24 मई को बढ़कर 313 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ईंधन कम जलने से तुरंत हवा साफ नहीं होगी।
जिला प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वाहनों के धुएं के अलावा भी कई कारक जिम्मेदार हैं। औद्योगिक धुआं, खुले में कूड़ा जलाना और निर्माण कार्य प्रदूषण बढ़ाने के मुख्य कारण हैं। सड़कों से कम से कम 60 प्रतिशत वाहन घटने पर ही वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार दिखेगा।
Author: Ajay Mishra


