1 जून तक वेतन नहीं मिला तो थम जाएंगी एचआरटीसी बसें, यूनियन ने सरकार और प्रबंधन को दी चेतावनी

Shimla News: हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में देरी और लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। चालक-परिचालक यूनियन ने साफ कहा है कि यदि 1 जून को कर्मचारियों के खातों में वेतन नहीं पहुंचा तो 2 जून से प्रदेशभर में एचआरटीसी बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है।

शनिवार को शिमला में एचआरटीसी प्रबंधन और चालक-परिचालक यूनियन के बीच विभिन्न मांगों को लेकर बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों और बकाया भुगतान के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है, जो चिंताजनक स्थिति है।

वेतन नहीं तो काम नहीं का ऐलान

मान सिंह ठाकुर ने कहा कि यूनियन पहले ही 13 मई को सरकार और निगम प्रबंधन को नोटिस देकर अपनी मांगों और संभावित आंदोलन की जानकारी दे चुकी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 1 जून को वेतन जारी हो जाता है तो कोई आंदोलन नहीं होगा, लेकिन वेतन में देरी होने पर कर्मचारी काम बंद करने को मजबूर होंगे।

यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा अब काफी लंबी हो चुकी है। बार-बार वेतन और अन्य वित्तीय लाभों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि नियमित सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर आर्थिक अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।

अग्रिम टिकट बुकिंग पर भी उठाए सवाल

यूनियन ने निगम प्रशासन को सलाह दी है कि वेतन भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक अग्रिम टिकट बुकिंग से बचा जाए। यूनियन का कहना है कि यदि टिकटों की बुकिंग जारी रहती है और बाद में बसें नहीं चल पातीं, तो यात्रियों को होने वाली असुविधा और आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी पूरी तरह निगम प्रशासन की होगी।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यूनियन ने प्रबंधन से समय रहते समाधान निकालने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में आम लोगों को परेशानी नहीं देना चाहते, लेकिन लंबे समय से लंबित मुद्दों के कारण आंदोलन की राह अपनाने की नौबत आ रही है।

150 करोड़ से ज्यादा बकाया भुगतान लंबित

यूनियन के अनुसार कर्मचारियों का लगभग 150 करोड़ रुपये का नाइट ओवरटाइम भुगतान अभी तक नहीं मिला है। इसके अलावा करोड़ों रुपये के एरियर भी लंबित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद भुगतान की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है।

मेडिकल रीइंबर्समेंट की राशि भी कर्मचारियों की बड़ी चिंता बनी हुई है। यूनियन के मुताबिक करीब 20 करोड़ रुपये के मेडिकल दावे अभी तक लंबित हैं। इससे कई कर्मचारी और उनके परिवार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। यूनियन ने इस भुगतान को प्राथमिकता के आधार पर जारी करने की मांग उठाई है।

यूनियन ने यह मुद्दा भी उठाया कि प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों को एरियर की किस्तों का लाभ मिल चुका है। कई कर्मचारियों को 50 हजार रुपये तक की राशि जारी की गई है, जबकि एचआरटीसी कर्मचारियों को अब तक समान लाभ नहीं मिल पाया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

कुछ मांगों पर बनी सहमति

बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक सहमति भी बनी। यूनियन के अनुसार चालकों द्वारा ‘परना’ इस्तेमाल नहीं करने संबंधी आदेश को वापस लेने पर सहमति बनी है। इसके अलावा पदोन्नति, नई भर्ती और रिकवरी से जुड़े कुछ मामलों में भी प्रबंधन ने कर्मचारियों की मांगें स्वीकार की हैं।

यूनियन ने इन निर्णयों के लिए प्रबंधन का आभार जताया, लेकिन कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा वित्तीय बकायों का है। बैठक में प्रबंधन ने बजट की कमी का हवाला देते हुए तत्काल भुगतान करने में असमर्थता जताई। इसी कारण वेतन और बकाया राशि को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश के अन्य विभागों में वेतन और भत्तों का भुगतान नियमित रूप से हो रहा है, जबकि एचआरटीसी कर्मचारी लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। यूनियन ने सरकार से हस्तक्षेप कर जल्द समाधान निकालने और कर्मचारियों के लंबित भुगतान जारी करने की मांग की है।

Author: Sunita Gupta

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