Himachal News: हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षकों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक संयुक्त कार्यवाही समिति ने सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश में सातवां वेतनमान लागू होने के बावजूद करियर एडवांसमेंट स्कीम अब तक लागू नहीं हुई है। इसके कारण पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों की पदोन्नतियां पूरी तरह रुकी हुई हैं। समिति ने अपनी मांगें जल्द पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की सख्त चेतावनी दी है।
अधिसूचना न होने से तीन साल से पदोन्नतियां ठप
जेएसी पदाधिकारियों ने सोमवार को एक पत्रकार वार्ता में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। यूजीसी ने वेतन पुनरीक्षण समिति की सिफारिशों पर सातवां वेतनमान लागू किया था। इसके तहत देश के अधिकांश राज्यों में शिक्षक पदोन्नति का लाभ ले रहे हैं। हिमाचल सरकार ने वर्ष दो हजार बाईस में वेतनमान तो लागू कर दिया। लेकिन सीएएस और उच्च योग्यता पर प्रोत्साहन वेतन वृद्धि की शर्त को अलग आदेश से लागू करने की बात कही गई, जो आज तक पूरी नहीं हुई।
सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को हो रहा भारी नुकसान
अलग अधिसूचना जारी न होने के कारण शिक्षकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साल दो हजार बाईस से लेकर अब तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हो पाई है। इससे उन शिक्षकों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जो अगले दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ये शिक्षक अपनी वैध पदोन्नति से पूरी तरह वंचित हैं। प्रदेश के अन्य सरकारी विभागों में कर्मचारियों को नियमित पदोन्नतियां और बकाया लाभ समय पर दिए जा रहे हैं।
गिरते मनोबल से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। इसका सीधा असर शिक्षकों के मनोबल पर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति में भी स्पष्ट है कि शिक्षा की गुणवत्ता संतुष्ट शिक्षकों पर निर्भर करती है। जेएसी अध्यक्ष प्रो जनार्दन सिंह और महासचिव प्रो नितिन व्यास ने सरकार से कड़ी मांग की है। उन्होंने सातवें वेतनमान के तहत करियर एडवांसमेंट स्कीम को बिना किसी देरी के तुरंत लागू करने का सख्त आग्रह किया है।


