हिमाचल में ईंधन की बढ़ी कीमतों से मचेगा हाहाकार: अब जेब होगी और ढीली, ट्रांसपोर्टरों ने की बड़ी मांग

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी से आम जनता की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। ईंधन महंगा होने से राज्य में बस, ट्रक और टैक्सी का किराया बढ़ना अब तय माना जा रहा है। निजी वाहन ऑपरेटरों ने इस संबंध में राज्य सरकार से किराये में तत्काल बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा।

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि सरकार को किराये में संशोधन करने में अब बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। पहले तेल के दामों में महज 20 से 25 पैसे या फिर एक रुपये तक की मामूली बढ़ोतरी होती थी। हालांकि, इस बार सरकार ने सीधे तीन रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि कर दी है। इससे ऑपरेटरों को रोजाना भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसे झेलना अब उनके लिए नामुमकिन है।

पर्यटन कारोबार और एडवांस बुकिंग पर संकट

राज्य में इस समय पर्यटन का पीक सीजन चल रहा है। टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर ऑपरेटरों के पास जनजातीय क्षेत्रों के दौरों के लिए पहले से ही भारी एडवांस बुकिंग मौजूद है। किराया तुरंत बढ़ने से पर्यटकों और ऑपरेटरों के बीच विवाद पैदा हो सकता है। यदि ऑपरेटर अपने स्तर पर ही चुपके से किराया बढ़ा देते हैं, तो इसका सीधा और बहुत बड़ा झटका घूमना-फिरना पसंद करने वाले आम पर्यटकों को लगेगा।

डीजल के दाम बढ़ने से केवल सफर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा का जरूरी सामान भी बेहद महंगा हो जाएगा। मालभाड़ा बढ़ने से मंडियों तक सब्जियां और राशन पहुंचाना खर्चीला हो जाएगा। ट्रक और पिकअप का किराया बढ़ने से हिमाचल के किसानों और बागवानों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्हें अपनी फसलों को बाहरी राज्यों और स्थानीय मंडियों तक पहुंचाने के लिए अब अपनी जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

साल 2010 से नहीं बढ़ा है वाहनों का किराया

देवभूमि टैक्सी ऑपरेटर संघ ने इस मूल्य वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। संघ के पदाधिकारी नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि स्पेयर पार्ट्स, इंश्योरेंस, टैक्स और टोल टैक्स पहले ही बहुत महंगे हो चुके हैं। परिवहन विभाग ने साल 2010 के बाद से टैक्सियों का आधिकारिक किराया नहीं बढ़ाया है। बाघा लैंड लूजर ट्रक ऑपरेटर यूनियन के सदस्य परस राम ने भी कहा कि किराया न बढ़ा तो ट्रक खड़े करने पड़ेंगे।

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 24,48,291 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें सबसे ज्यादा 12,85,182 मोटरसाइकिल और स्कूटर शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 8,04,582 कारें, 1,85,645 गुड्स कैरियर और 42,011 मोटर कैब चल रही हैं। राज्य में 22,309 कृषि ट्रैक्टर, 12,439 मैक्सी कैब और 11,226 बसें भी पंजीकृत हैं। इन लाखों वाहनों पर ईंधन की नई दरों का बहुत व्यापक और गहरा असर पड़ने वाला है।

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