‘रोजाना 100 रुपये कमाने वाला पक्का मकान और बाइक कैसे रख सकता है?’ हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले ने सबको चौंकाया

Himachal News: क्या महज सौ रुपये रोजाना कमाने वाला इंसान छह लोगों का पेट पालकर पक्का मकान और बाइक रख सकता है? यह अहम सवाल हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान उठाया है। एक महिला ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी पाने के लिए अपनी सालाना पारिवारिक आय 35 हजार रुपये बताई थी। लेकिन, महिला के असल रहन-सहन ने उसकी पोल खोल दी। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए महिला की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि इतनी कम आय में ऐसा जीवन जीना व्यावहारिक रूप से बिल्कुल नामुमकिन है।

महज 100 रुपये में 6 लोगों का गुजारा पूरी तरह असंभव

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत में इस दिलचस्प मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने पाया कि अगर परिवार की सालाना आय 35 हजार रुपये मान भी ली जाए, तो यह रोजाना सिर्फ 100 रुपये बनती है। महिला चाहती थी कि अदालत यह मान ले कि वह महज 100 रुपये में अपने पति और चार बच्चों का पेट पाल रही है। इसके साथ ही वह मोटरसाइकिल का भारी खर्च भी इसी मामूली आय से उठा रही है। अदालत ने महिला के इस दावे को पूरी तरह से आधारहीन और अविश्वसनीय करार दिया है।

क्या है आंगनबाड़ी भर्ती का यह पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद मंडी जिले की बल्ह तहसील से जुड़ा हुआ है। साल 2020 में यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए भर्ती हुई थी। चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों ने एक-दूसरे के आय प्रमाण पत्र पर गंभीर सवाल उठाए थे। मामले की शिकायत एसडीएम बल्ह (अपीलीय प्राधिकारी) के पास पहुंची थी। जांच में सामने आया कि महिला के पास दो पक्के मकान हैं। वह एक किराए की दुकान में सिलाई का काम भी करती है और पति के पास एक मोटरसाइकिल है। इसके बाद एसडीएम ने महिला का आय प्रमाण पत्र तुरंत रद्द कर दिया था।

महिला ने दी कई दलीलें, लेकिन कोर्ट ने नहीं मानी एक भी बात

एसडीएम के इसी कड़े फैसले को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने अदालत में दलील दी कि उसके पास आय का कोई पक्का साधन नहीं है। उसने बताया कि पक्का मकान साल 2017-18 में मिली 1.30 लाख रुपये की सरकारी मदद से बना था। महिला ने यह भी कहा कि बीमारी के कारण उसकी सिलाई की दुकान तीन साल से बंद है। वह दुकान का किराया भी नहीं दे पा रही है। मोटरसाइकिल भी सेकंड हैंड खरीदी गई थी। लेकिन, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए एसडीएम के फैसले को एकदम सही ठहराया है। अदालत ने माना कि महिला ने अपनी असली आय प्रशासन से छिपाई है।

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