Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन अब यहां से दलितों पर अत्याचार की भयानक तस्वीरें आ रही हैं। राज्य में लगातार बढ़ रहे जातिगत अपराधों ने सबको चौंका दिया है। शिमला स्थित गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। उन्होंने राष्ट्रपति से जल्द व्यक्तिगत मुलाकात का समय मांगा है। पत्र में दलित समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और प्रशासन की विफलता का विस्तार से उल्लेख है।
मासूम बच्चों के साथ अमानवीय क्रूरता
रवि कुमार ने पत्र में रोहड़ू के बारह वर्षीय दलित बालक सिकंदर का भयानक मामला उठाया है। सवर्ण महिला ने घर में प्रवेश करने पर उसे गौशाला में बंद कर दिया। महिला ने परिवार से शुद्धिकरण के लिए बकरे की मांग की। इस भारी अपमान के कारण सिकंदर ने आत्महत्या कर ली। वहीं खड़ापानी में आठ वर्षीय छात्र के साथ भी क्रूरता हुई। स्कूल के शिक्षकों ने उसके पैंट में बिच्छू डाल दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
राज्य में दलित महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर भी गंभीर संकट है। कुल्लू की सैंज घाटी में एक दलित महिला के साथ बेहद खौफनाक वारदात हुई। अपराधियों ने बलात्कार और हत्या के बाद शव को पेड़ से लटका दिया। दूसरी तरफ धर्मशाला के सरकारी कॉलेज में भी भयानक मामला सामने आया। वरिष्ठ छात्राओं ने उन्नीस वर्षीय पल्लवी को रैगिंग और यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया। लगातार हुए दुर्व्यवहार से परेशान होकर छात्रा ने दम तोड़ दिया।
व्यवस्थागत जातिवाद और निराशाजनक न्याय दर
गदर फ्रंट ने अपने पत्र में व्यवस्थागत जातिवाद की गहरी जड़ों की ओर इशारा किया है। सवर्ण लोग प्रदेश में दलितों को कई जगह मंदिरों में प्रवेश करने से रोकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक तत्व सरकारी अधिकारियों तक का जाति के आधार पर अपमान करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े भी राज्य में अनुसूचित जाति अत्याचार बढ़ने की पुष्टि करते हैं। प्रशासन की लापरवाही से न्याय मिलने की दर बहुत निराशाजनक है।
राष्ट्रपति से कड़े हस्तक्षेप की अपील
दलित समुदाय ने सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए राष्ट्रपति से गहरी उम्मीदें लगाई हैं। रवि कुमार ने पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति से व्यक्तिगत मुलाकात का समय मांगा है। वे मुलाकात के दौरान दलितों की वास्तविक स्थिति के प्रामाणिक दस्तावेज राष्ट्रपति को सौंपना चाहते हैं। गदर फ्रंट चाहता है कि संवेदनशील मामले में केंद्र और राज्य सरकार कड़े कदम उठाए। राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए दलित समुदाय को त्वरित न्याय की उम्मीद है।


