शपथ पत्र में पढ़ाई-लिखाई की गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण नहीं, हाई कोर्ट के फैसले से चुनावी मैदान में उम्मीदवारों को मिली बड़ी राहत

Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनावी शपथ पत्र में शैक्षिक योग्यता को लेकर दिए गए झूठ को लेकर बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपनी पढ़ाई की गलत जानकारी देना जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 123(4) के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की पीठ ने यह निर्णय करोल बाग से पूर्व आप विधायक विशेष रवि के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए दिया।

भाजपा प्रत्याशी ने शपथ पत्र में झूठ का आरोप लगाकर चुनाव को दी थी चुनौती

2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में करोल बाग सीट से भाजपा उम्मीदवार योगेंद्र चंदोलिया ने आम आदमी पार्टी के विशेष रवि की जीत को अदालत में चुनौती दी थी। चंदोलिया ने दलील दी कि विशेष रवि ने फार्म 26 में अपनी शैक्षिक योग्यता गलत बताई है। इस आधार पर उन्होंने विशेष रवि के चुनाव को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में तर्क दिया गया कि ऐसी जानकारी मतदाताओं को गुमराह करती है और यह भ्रष्ट आचरण है।

अदालत ने कहा, शैक्षिक जानकारी का मतदान प्रक्रिया पर सीधा असर नहीं

पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जनप्रतिनिधि अधिनियम में भ्रष्ट आचरण की परिभाषा स्पष्ट है। धारा 123 के तहत रिश्वत, अवैध प्रभाव, धमकी या जाति-धर्म के आधार पर वोट मांगने जैसे कार्य ही भ्रष्ट आचरण माने जाते हैं। अदालत ने माना कि शैक्षिक योग्यता की गलत जानकारी इस दायरे में नहीं आती। इसलिए यह चुनाव रद्द करने का कानूनी आधार नहीं बन सकता।

विशेष रवि को बड़ी राहत, बरकरार रहेगी विधायकी

अदालत के इस फैसले से पूर्व विधायक विशेष रवि को बड़ी राहत मिली है। याचिका खारिज होने के बाद उनके खिलाफ चुनाव अमान्य करने की कार्यवाही समाप्त हो गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस निर्णय से भविष्य में शैक्षिक योग्यता को लेकर उठाए जाने वाले चुनावी विवादों पर काफी हद तक विराम लगेगा। हालांकि, अदालत ने नैतिकता के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की।

Hot this week

Related News

Popular Categories