Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने पंचायत चुनाव से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। सरकार ने इसके लिए एक विशेष संशोधन प्रस्ताव जारी किया है। नए नियमों के तहत जिला उपायुक्त (DC) अब जिला परिषद और ब्लॉक समिति के अध्यक्षों के चयन की बैठक कभी भी बुला सकेंगे। पहले इसके लिए सात दिन की समयसीमा अनिवार्य थी। सरकार का यह कदम प्रशासनिक शक्तियों को बढ़ाने और चुनावी प्रक्रियाओं को और अधिक लचीला बनाने वाला माना जा रहा है।
चुनाव नियमों में संशोधन के लिए सात दिन का समय
राज्य सरकार ने इन प्रस्तावित बदलावों को ‘हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) तीसरा संशोधन नियम, 2026’ का नाम दिया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार ने आम जनता से इन नए नियमों पर सात दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। यदि किसी व्यक्ति को इन संशोधनों पर कोई आपत्ति है, तो वह निदेशक पंचायती राज के कसुम्पटी स्थित कार्यालय में अपनी बात रख सकता है। इसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला लेगी।
शपथ और चुनाव की बैठकों के लिए बदलेंगे पुराने नियम
प्रस्तावित संशोधनों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बैठकों के आयोजन के समय को लेकर किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद पहली बैठक के लिए सात दिन का नोटिस जरूरी था। अब इसे बदलकर ‘उसी दिन या कभी भी’ बुलाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, निष्ठा की शपथ और अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए अब अलग-अलग नोटिस जारी किए जाएंगे। इस बदलाव से चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
दस दिन की समयसीमा वाले पुराने प्रावधान होंगे समाप्त
पंचायती राज विभाग ने पुरानी जटिलताओं को खत्म करने के लिए कई अन्य प्रस्ताव भी रखे हैं। पहली बैठक और स्थगित की गई बैठकों से जुड़ी दस दिन की समयसीमा को पूरी तरह समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उपायुक्तों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार इन सभी प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही इसे कानून के रूप में लागू करने का काम करेगी।
कसुम्पटी स्थित पंचायती राज निदेशालय में दें सुझाव
हिमाचल सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस प्रारूप को सार्वजनिक किया है। जो भी नागरिक अपने सुझाव देना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित समय के भीतर एसडीए कॉम्प्लेक्स शिमला पहुंचना होगा। सरकार चाहती है कि पंचायती राज संस्थाओं का गठन बिना किसी देरी के सुचारू रूप से हो सके। यह संशोधन ग्रामीण राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी राजनीतिक दल और जागरूक नागरिक इस अधिसूचना पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।


