Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने सील्ड सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोकने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुस्साए वकीलों ने छोटा शिमला से हाई कोर्ट मार्ग पर पुलिस की पाबंदी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सचिवालय के बाहर जमकर नारेबाजी की।
ओक ओवर से सचिवालय तक वकीलों का मार्च
सैकड़ों अधिवक्ताओं ने पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सरकारी आवास ओक ओवर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद वकीलों ने वहां से सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। आंदोलनकारी वकील सुरक्षा प्रतिबंधों के बीच सीधे मुख्यमंत्री को वार्ता के लिए बाहर बुलाने की मांग पर अड़ गए।
इसी हंगामे के बीच लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सरकारी गाड़ी वहां से गुजर रही थी। प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने पुलिस पर भारी दबाव बनाया। उन्होंने नियमों का हवाला देकर मौके पर ही मंत्री के वाहन का 1500 रुपये का चालान कटवा दिया।
चालान की इस बड़ी कार्रवाई के समय पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह खुद गाड़ी में मौजूद नहीं थे। कार में उनकी माता और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सवार थीं। वकीलों के कड़े तेवर देखकर पुलिसकर्मियों को मजबूरी में यह कानूनी कदम उठाना पड़ा।
कार्ट रोड के भारी जाम से न्यायिक कार्य प्रभावित
अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस उनकी गाड़ियों को बीच रास्ते में बेवजह रोक रही है। इस कारण उन्हें समय पर अदालत पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिसकर्मी वकीलों को लंबा चक्कर काटकर कार्ट रोड से जाने के लिए कह रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस ठाकुर ने कहा कि कार्ट रोड पर हमेशा बहुत भारी ट्रैफिक जाम रहता है। इस वजह से वकील समय पर कोर्ट नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे रोज का न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और न्याय प्रशासन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
वकीलों ने साफ किया कि छोटा शिमला सचिवालय मार्ग से हाई कोर्ट तक उनकी आवाजाही वर्षों से बिना रोक-टोक होती रही है। वे सुबह अदालत जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। इससे शहर की यातायात व्यवस्था में कोई अव्यवस्था पैदा नहीं होती है।
पुराने नियम बहाल न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ताओं ने बताया कि उन्हें सरकार के किसी नए लिखित आदेश की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पुलिस लगातार उनके वाहन रोक रही है। वकीलों का आग्रह है कि पुरानी व्यवस्था को तुरंत यथावत बहाल किया जाना चाहिए।
अधिवक्ता एचएस ठाकुर ने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री स्वयं भी एक वकील रहे हैं। वे वकीलों की व्यावहारिक परेशानियों और समय की अहमियत को बहुत अच्छी तरह समझते हैं।
वकीलों ने सरकार को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी मांगों के समर्थन में प्रदेश के अन्य विभिन्न मुख्य स्थानों पर भी उग्र प्रदर्शन करेंगे।
Author: Sunita Gupta

