Kerala News: कांग्रेस विधायक शानीमोल उस्मान ने मंगलवार को केरल विधानसभा में बड़ी जीत दर्ज की है। वह 16वीं राज्य विधानसभा की नई उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। इस चुनावी मुकाबले में उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को भारी अंतर से पटखनी दी। शानीमोल को सदन में कुल 99 वोट मिले हैं।
दूसरी तरफ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) समर्थित उम्मीदवार मोहम्मद मोहसिन को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के मोहम्मद मोहसिन केवल 34 वोट ही जुटा सके। विधानसभा अध्यक्ष तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने संसदीय परंपरा का सम्मान करते हुए खुद वोटिंग प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी।
35 साल बाद किसी महिला ने संभाला यह बड़ा पद
शानीमोल उस्मान का इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर पहुंचना बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है। केरल विधानसभा में पूरे 35 साल के लंबे इंतजार के बाद कोई महिला उपाध्यक्ष बनी है। इसके साथ ही वह इस पद को संभालने वाली राज्य के इतिहास की चौथी महिला बन गई हैं।
इस महत्वपूर्ण चुनाव के दौरान भाजपा के तीन विधायकों ने सदन में मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा दोनों प्रमुख गठबंधनों के कुछ बड़े चेहरे भी वोटिंग से गायब रहे। यूडीएफ के आबिद हुसैन थंगल, संदीप वारियर और एलडीएफ के सी.के. हरींद्रन भी सदन में अनुपस्थित रहे।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ शानीमोल का लंबा सफर
शानीमोल उस्मान पहली बार अलाप्पुझा जिले के अरूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई हैं। भले ही वह पहली बार विधानसभा पहुंची हैं, लेकिन उनका संगठनात्मक अनुभव काफी पुराना है। उन्होंने छात्र जीवन से ही कांग्रेस राजनीति में अपनी एक मजबूत और अलग पहचान बनाई है।
वह पूर्व में केरल छात्र संघ (केएसयू) की उपाध्यक्ष और केरल विश्वविद्यालय सीनेट की सदस्य रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सचिव का पद भी संभाला है। उन्होंने अलाप्पुझा नगर पालिका की अध्यक्ष के रूप में भी बेहतरीन प्रशासनिक कार्य किए हैं।
उच्च शिक्षित नेता के कंधों पर आई बड़ी जिम्मेदारी
शानीमोल उस्मान एक बेहद उच्च शिक्षित और विज़नरी राजनेता हैं। उन्होंने कानून की बारीकियों को समझने के लिए एमए और एलएलबी की डिग्रियां हासिल की हैं। उनकी इस मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पुराने अनुभव से सदन को सुचारु रूप से चलाने में बड़ी मदद मिलेगी।
अब नए उपाध्यक्ष के रूप में शानीमोल उस्मान पर सदन की गरिमा बनाए रखने का जिम्मा होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक उनका यह चयन केरल की मुख्यधारा की राजनीति में महिलाओं के बढ़ते दबदबे को दिखाता है। यह ऐतिहासिक जीत देश की अन्य महिला नेताओं को प्रेरित करेगी।
Author: Nikhil Nair


